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आम की गुठलियों से पाउडर और बटर ऑयल बनाने की तकनीक विकसित, बीएयू सबौर की नई पहल

भागलपुर, 7 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के वैज्ञानिकों ने आम की बेकार समझी जाने वाली गुठलियों का उपयोग कर पाउडर और बटर ऑयल तैयार करने की नई तकनीक विकसित की है।

भागलपुर, 7 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) सबौर के वैज्ञानिकों ने आम की बेकार समझी जाने वाली गुठलियों का उपयोग कर पाउडर और बटर ऑयल तैयार करने की नई तकनीक विकसित की है।

सबौर के वैज्ञानिकों ने इस नवाचार में 'रिफ्रैक्टेंस विंडो ड्राइंग' और 'कोल्ड-प्रेस एक्सट्रैक्शन' तकनीकों का उपयोग किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक न केवल कृषि अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन में सहायक होगी, बल्कि खाद्य, कॉस्मेटिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे उद्योगों के लिए भी उपयोगी साबित होगी। विश्वविद्यालय की योजना इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर पूरे देश में लागू करने की है।

बिहार कृषि सबौर के नेचर क्लब के सचिव एवं कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवधेश पॉल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने आम की गुठलियों और उनसे बनने वाले उत्पादों पर विस्तृत अध्ययन किया है। नेचर क्लब के स्वयंसेवक पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से विभिन्न फलों की गुठलियां एकत्रित करते थे और बच्चों को उन्हें लगाने तथा पौधारोपण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित करते थे। इसी दौरान वैज्ञानिकों ने गुठलियों के वैकल्पिक उपयोग पर शोध शुरू किया, जिससे कई उपयोगी उत्पाद विकसित करने में सफलता मिली।

उन्होंने कहा कि इस बार हमारे वैज्ञानिकों ने फल की गुठलियों से तरह-तरह की चीजें बनाईं और लोगों को जागरूक किया। इसके लिए हमने लोगों को जागरूक किया और बीज एकत्रित कर अपना काम शुरू किया।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. कंचन कुमारी ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि आम के गूदे से पेय पदार्थ तैयार करने के बाद बड़ी मात्रा में गुठलियां बच जाती हैं। इन गुठलियों को पहले धूप में सुखाया जाता है, फिर आधुनिक तकनीकों की मदद से उनका प्रसंस्करण कर पाउडर और बटर ऑयल तैयार किया जाता है।

उन्होंने कहा कि ये उत्पाद पोषण और औद्योगिक उपयोग की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। इस पहल से खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में निकलने वाले अपशिष्ट का बेहतर उपयोग संभव होगा, किसानों और उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर बनेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ वेस्ट मैनेजमेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। इसको हम लोग विभिन्न तरह से कई पाउडर बनाते हैं जिसका उपयोग लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में बागवानी विभाग के चेयरमैन डॉ. अहमार आफताब ने कहा, "पहले लोग आम की गुठलियां इकट्ठा करते थे। इन गुठलियों से पौधे उगाए जाते थे, जिनका इस्तेमाल ग्राफ्टिंग के ज़रिए आम के पौधे तैयार करने में रूटस्टॉक के तौर पर होता था। हालांकि, इसके बाद भी बड़ी मात्रा में आम की गुठलियां बच जाती हैं, क्योंकि आम के कुल आकार का लगभग 10 से 23 प्रतिशत हिस्सा गुठली का ही होता है। हमारे वैज्ञानिकों ने इसके इस्तेमाल का एक बहुत अच्छा विकल्प खोजा है गुठली के अंदर की गिरी। इस गिरी में कई पोषक तत्व होते हैं।"

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

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