ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: सनातन धर्म में कई सारे व्रत त्योहार पड़ते हैं और सभी का अपना महत्व होता है लेकिन प्रदोष व्रत को बहुत ही खास माना गया है जो कि हर माह में दो बार पड़ता है यह तिथि भगवान शिव की साधना आराधना को समर्पित होती है

इस दिन भक्त दिनभर उपवास आदि रखते हुए भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की विधिवत पूजा करते हैं माना जाता है कि ऐसा करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। साथ ही सभी कार्यों में सफलता हासिल होती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि अक्टूबर माह में प्रदोष व्रत कब किया जाएगा। इसकी तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, तो आइए जानते हैं।

प्रदोष व्रत की तारीख और मुहूर्त—
हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 अक्टूबर को देर रात 3 बजकर 42 मिनट से आरंभ हो रही है और इसका समापन अगले दिन यानी की 16 अक्टूबर को देर रात 12 बजकर 19 मिनट पर हो जाएगा। वही त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने का विधान होता है।

इस प्रकार 15 अक्टूबर को प्रदोष व्रत किया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल यानी पूजा का समय शाम को 5 बजकर 38 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 13 मिनट तक है। इस मुहूर्त में भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है। प्रदोष व्रत के दिन शिव साधना उत्तम फल प्रदान करती है।


