ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: देवी साधना का महापर्व नवरात्रि देशभर में धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है और आज यानी 2 अक्टूबर दिन रविवार का शारदीय नवरात्रि का सातवां दिन है जो मां दुर्गा के सातवें रूप मां कालरात्रि को समर्पित है इस दिन देवी मां की पूजा आराधना का विधान है मां कालरात्रि की पूजा के लिए रात्रि का समय सबसे शुभ और श्रेष्ठ माना जाता है

मां दुर्गा ने शुंभ, निशुंभ और रक्तबीज का विनाश करने के लिए कालरात्रि का रूप धारण किया था मान्यता है कि नवरात्रि के सातवें दिन देवी मां कालरात्रि की आराधना करने से शत्रु पर विजय प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है और हर तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा नवरात्रि के सातवें दिन की पूजन विधि और आरती के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

मां कालरात्रि पूजन विधि—
आज यानी नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा आराधना की जा रही हैं देवी मां की पूजा दो तरह से की जाती है एक तंत्र मंत्र वाली और दूसरी शास्त्रीय पूजन। वही गृहस्थ लोगों को देवी मां की पूजा शास्त्रीय विधि से करना शुभ होता है देवी मां की पूजा में शामिल हो रहे लोगों को नीले वस्त्र धारण करने चाहिए माता को यह रंग प्रिय होता है पूजा में देवी मां को भोग के रूप में गुड़ अर्पित करें देवी मां को रातरानी या गेंदे के पुष्प आप अर्पित कर सकते हैं पूजन में घी का दीपक जाएं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करें मां कालरात्रि की पूजा में साफ सफाई का ध्यान रखना जरूरी होता है वही सुबह पूरे विधि विधान से देवी मां की पूजा करें और उनकी आरती जरूर पढ़ें। फिर रात्रि में स्नन कर लाल वस्त्र पहनकर 108 बार नर्वाण मंत्र "ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ " का जाप करें माना जाता है कि ऐसा करने से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है देवी मां की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से माता प्रसन्न होकर कृपा करती है।

मां कालरात्रि की आरती—
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुन गाए भारती, हे मैया, हम सब उतारे तेरी आरती |
तेरे भक्त जनो पार माता भये पड़ी है भारी |
दानव दल पार तोतो माड़ा करके सिंह सांवरी |
सोउ सौ सिंघों से बालशाली, है अष्ट भुजाओ वली,
दुशटन को तू ही ललकारती |
हे मैया, हम सब उतारे तेरी आरती |
माँ बेटी का है इस् जग जग बाड़ा हाय निर्मल नाता |
पूत कपूत सुने है पर ना माता सुनी कुमाता |
सब पे करुणा दर्शन वालि, अमृत बरसाने वाली,
दुखीं के दुक्खदे निवर्तती |
हे मैया, हम सब उतारे तेरी आरती |
नहि मँगते धन धन दौलत ना चण्डी न सोना |
हम तो मांगे तेरे तेरे मन में एक छोटा सा कोना |
सब की बिगड़ी बान वाली, लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को संवरती |
हे मैया, हम सब उतारे तेरी आरती |
चरन शरण में खडे तुमहारी ले पूजा की थाली |
वरद हस् स सर प रख दो म सकत हरन वली |
माँ भार दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओ वली,
भक्तो के करेज तू ही सरती |
हे मैया, हम सब उतारे तेरी आरती |
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली |
तेरे ही गुन गाए भारती, हे मैया, हम सब उतारे तेरी आरती |


