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जन्माष्टमी विशेष: जानिए क्या होता था गोकुल में, जब बजती थी श्रीकृष्ण की मुरली…

जयपुर। आज भगवान श्री कृष्ण का जन्म दिवस जन्माष्टमी हैं। हर तरफ इस पावन पर्व की धूम हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण 64 कलाओं में नुपूर्ण थे। वे भगवान के अब तक के सभी अवतारों में पूर्ण अवतार थे। पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण गोकुल में सभी के चहेते थे। जब वे
जन्माष्टमी विशेष: जानिए क्या होता था गोकुल में, जब बजती थी श्रीकृष्ण की मुरली…

जयपुर। आज भगवान श्री कृष्ण का जन्म दिवस जन्माष्टमी हैं। हर तरफ इस पावन पर्व की धूम हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण 64 कलाओं में नुपूर्ण थे। वे भगवान के अब तक के सभी अवतारों में पूर्ण अवतार थे। पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण गोकुल में सभी के चहेते थे। जब वे अपनी मुरली बजाते थे। तो सभी लोग उनकी मुरली की धुन सुनकर उनकी तरफ चले आते थे। आज हम आपको इस आर्टिकल में एक गोपी देवारा श्री कृष्ण की मुरली की धुन को लेकर की गई वाख्या के बारे में बताने जा रहे है कि जब श्री कृष्ण की मुरली बजती थी तो गोकुल में क्य होता था।
जन्माष्टमी विशेष: जानिए क्या होता था गोकुल में, जब बजती थी श्रीकृष्ण की मुरली…
‘सुखद शरद का हुआ आगमन
वन में खड़ी हुई ग्वालिन।
लो, बांट रहे हैं सुरभि सुमन,
उस मलयाचल से बही पवन।’

ऐसा था वह प्रफुल्ल करने वाला पावन समय। हृदयाकाश में शरद ऋतु होनी चाहिए। अब हृदय में वासना विकार के बादल नहीं हैं। आकाश स्वच्छ है। शरद ऋतु में आकाश निरभ्र रहता है। नदियों की गंदगी नीचे बैठ जाती है। शंख जैसा स्वच्छ पानी बहता रहता है। हमारा जीवन भी ऐसा ही होना चाहिए। आसक्ति के बादल नहीं घिरने चाहिए। अनासक्त रीति से केवल ध्येयभूत कर्मों में ही मन रंग जाना चाहिए। रात-दिन आचार और विचार शुद्ध होते रहने चाहिए। शरद ऋतु है और है शुक्ल पक्ष। प्रसन्न चंद्र का उदय हो चुका है। चंद्र का मतलब है मन का देवता। चंद्र उगा है, इसका यह मतलब है कि मन का पूर्ण विकास हो गया है। सद्भाव खिल गया है। सद्विचारों की शुभ चांदनी खिली हुई है। अनासक्त हृदयाकाश में चंद्र सुशोभित हुआ है। प्रेम की पूर्णिमा खिल गई है।
जन्माष्टमी विशेष: जानिए क्या होता था गोकुल में, जब बजती थी श्रीकृष्ण की मुरली…
ऐसे समय सारी गोपियां इकट्ठी होती हैं। सारी मनःप्रवृत्तियां श्रीकृष्ण के आसपास इकट्ठी हो जाती हैं। उन्हें इस बात की व्याकुलता रहती है कि हृदय सुव्यवस्थिता पैदा करने वाला, गड़बड़ी में से सुंदरता का निर्माण करने वाला वह श्यामसुंदर कहां है? उस ध्येयरूपी श्रीकृष्ण की मुरली सुनने के लिए सारी वृत्तियां अधीर हो उठती हैं।
जन्माष्टमी विशेष: जानिए क्या होता था गोकुल में, जब बजती थी श्रीकृष्ण की मुरली…
‘अपने आंगन में पानी डालकर मैं खूब कीच बना देती हूं और मैं उस कीच में चलने का अभ्यास करती हूं। क्योंकि उसकी मुरली सुनते ही मुझे जाना पड़ता है और यदि मार्ग में कीचड़ हुआ तो परेशानी होगी, लेकिन यदि आदत हुई तो भाग निकलुंगी।’
एक बार ध्येय के निश्चित हो जाने पर फिर चाहे वह विष हो, अपने मन का आकर्षण उसी तरफ होना चाहिए। कृष्ण की मुरली सुनते ही सबको दौड़ते हुए आना चाहिए। घेरा बनाना चाहिए। हाथ में हाथ डालकर नाचना चाहिए। अंतर्बाह्य एकता होनी चाहिए।
जन्माष्टमी विशेष: जानिए क्या होता था गोकुल में, जब बजती थी श्रीकृष्ण की मुरली…

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