ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: होली हिंदूओं का प्रमुख पर्व है जिसे देशभर में बड़ी धूमधाम और हर्षों उल्लास के साथ मनाया जाता है। रंगों का पर्व होली इस साल 8 मार्च को मनाया जाएगा। सभी जगहों की होली से वाराणसी की होली बेहद अलग है क्योंकि यहां पर भक्त भगवान शिव के साथ होली खेलते है। यहां की होली श्मशान की राख से खेली जाती है। अगर आप इस विषय में अधिक जानकारी हासिल करना चाहते है तो आपको आज का हमारा ये लेख पूरा पढ़ना होगा।

श्मशान की राख से खेली जाती है होली—
भारत में होली पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है यहां के कई स्थानों की होली बेहद मशहूर भी है लेकिन काशी की होली इन सभी से अलग मानी जाती है। क्योंकि काशी के महाश्मशान में रंगभरी एकादशी के दिन खेली जाने वाली होली सभी से अलग मानी जाती है जिसे मसान होली के नाम से जाना जाता है। क्योंकि यहां होली रंगों से नहीं बल्कि श्मशान की चिंता की राख से खेली जाती है जो इसे बाकियों से अलग बनाती है।

कहा जाता है कि काशी के महाशमशान में हमेशा ही चिताएं जलती रहती है और यहां पूरे साल लोग दुख और गम में डूबे रहते है लेकिन वर्ष में एकमात्र होली का दिन ऐसा है जब लोग यहां खुशियां मनाते है। कहते है कि काशी में होली पूरे दो दिनों तक मनाई जाती है।

रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव अपने भक्तों और देवी देवताओं के साथ रंग गुलाल से होली मनाते है और इसके अगले दिन मणिकर्णिका घाट पर वे अपने गणों के साथ चिता और भस्म से होली खेलते है। यही कारण है कि यहां की होली बाकी होलियों से बेहद अलग है।


