ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: दिवाली पर्व को बेहद ही खास माना जाता हैं हर साल दिवाली कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती हैं इस साल दिवाली 4 नवंबर दिन गुरुवार यानी आज मनाई जा रही हैं दिवाली पर लोग घरया दुकानों की साफ सफाई करते हैं मान्यता है कि माता लक्ष्मी को सफाई प्रिय हैं और माता लक्ष्मी का वास साफ सफाई वाली जगहों पर ही होता हैं दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष विधान हैं इस दिन संध्या और रात्रि के समय शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी विघ्नहर्ता श्री गणेश और माता लक्ष्मी सरस्वती की पूजा और आराधना की जाती हैं

पुराणों के अनुसार कार्तिक अमावस्या की अंधेरी रात में महालक्ष्मी स्वयं भूलोक पर आती हैं और हर घर में विचरण करती हैं इस दौरान जो घर हर तरह से साफ और प्रकाशवान हो, वहां वे अंश रूप में ठहर जाती हैं इसलिए दिवाली पर साफ सफाई करके विधि विधान से पूजन करने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा होती हैं। इस दिन लक्ष्मी पूजन के साथ कुबेर पूजा भी की जाती हैं। तो आज हम आपको लक्ष्मी पूजन के बारे में बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन से पहले घर की सफाई करें और पूरे घर में वातावरण की शुद्धि और पवित्रता के लिए गंगाजल का छिड़काव करें साथ ही घर के द्वार पर रंगोली और दीपक की एक श्रृंखला बनाएं। पूजा स्थल पर चौकी रखें और लाल वस्त्र बिछाएं। उस पर लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति रखें। चौकी के पास जल से भरा कलश रखें।

माता लक्ष्मी और श्री गणेश की मूर्ति पर तिलक करें दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर गुलाल आदि अर्पित करें मां की स्तुति करें। इसके साथ देवी सरस्वती, मां काली, भगवान विष्णु और कुबेर देव की भी विधि विधान से पूजा करें। महालक्ष्मी पूजन पूरे परिवार को एकत्रित होकर करना चाहिए। महालख्मी पूजन के बाद तिजोरी, बहीखाते और व्यापारिक उपकरण की पूजा करें पूजन के बाद श्रद्धा अनुसार जरूरतमंद लोगों को मिठाई और दक्षिणा दें।


