ज्योतिष न्यूज़ डेस्क: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष माना जाता है वही आज यानी फाल्गुन मास के शुकल पक्ष की एकादशी तिथि है जिसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है रंगभरी एकादशी को आमलकी एकादशी, आंवला एकादशी और आमलका एकादशी के नाम से भी जाना जाता है पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है

रंगभरी एकादशी अकेली ऐसी एकादशी है जिसका भगवान विष्णु के अलावा शिव से भी संबंध हैं। रंगभरी एकादशी के दिन शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा बाबा विश्वानाथ की नगरी वाराणसी में होती हैं रंगभरी एकादशी के पावन पर्व पर शिव के गण उन पर और जनता पर जमकर अबीर गुलाल उड़ाते हैं। रंगभरी एकादशी के दिन से ही वाराणसी में रंगों उत्सव का आगाज हाता है जो लगातार 6 दिनों तक चलता है तो आज हम आपको रंगभरी एकादशी की पूजा मुहूर्त और महत्व के साथ शिव का इससे संबंध बता रहे हैं तो आइए जानते हैं।

रंगभरी एकादशी का मुहूर्त—
एकादशी तिथि आरंभ— 13 मार्च, रविवार प्रातः 10: 21 मिनट पर
एकादशी तिथि समाप्त— 14 मार्च, सोमवार दोपहर 12:05 मिनट पर
रंगभरी एकादशी का शुभ मुहूर्त आरंभ— 14 मार्च, दोपहर 12: 07 मिनट से
रंगभरी एकादशी का मुहूर्त समाप्त— 14 मार्च, दोपहर 12: 54 मिनट तक
रंगभरी एकादशी उदयातिथि के अनुसार— 14 मार्च को मनाई जाएगी।
रंगभरी एकादशी के दिन इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 6:32 मिनट से रात्रि 10:08 मिनट तक रहेगा। रंगभरी एकादशी को पुष्य नक्षत्र रात्रि 10:08 मिनट तक होगा।
रंगभरी एकादशी की पूजन विधि—
रंगभरी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर लें और फिर व्रत का संकल्प करें। अगर शिव मंदिर जाना संभव न हो तो घर के ही मंदिर में शिव और मां पार्वती की तस्वीर रखें। उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं। अब शिव और पार्वती जी को फल, बेलपत्र, कुमकुम, रोली, पंच मेवा और अक्षत अर्पित करें। माता गौरी को सोलह श्रृंगार अर्पित करें। इसके बाद भगवान को रंग गुलाल अर्पित करें। दीपक और कपूर से आरती उतारें। भगवान को भोग लगा दें और फिर घर के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।


