ट्रम्प का बड़ा दावा, फुटेज में देंखे ईरान ने 10 तेल टैंकरों को गुजरने दिया, ऊर्जा ठिकानों पर हमले टले
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा संकट के बीच एक बार फिर तनाव और कूटनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान ने 10 तेल टैंकरों को सुरक्षित रूप से गुजरने दिया है, जिसे उन्होंने “गिफ्ट” करार दिया। ट्रम्प के अनुसार इन टैंकरों पर पाकिस्तान का झंडा लगा हुआ था और ईरान इस कदम के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसा जीतने की कोशिश कर रहा है।
ट्रम्प ने आगे दावा किया कि ईरान ने शुरुआत में 8 बड़े तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी और बाद में 2 और टैंकरों को भी सुरक्षित रूप से निकलने दिया। उनके मुताबिक यह कदम क्षेत्र में तनाव कम करने और कूटनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि इस संबंध में ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इसी बीच ट्रम्प ने एक और बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर प्रस्तावित हमलों को 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब इस कार्रवाई की नई डेडलाइन 6 अप्रैल तय की गई है। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका ने फिलहाल ईरान के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े ठिकानों पर किसी भी तरह की सैन्य कार्रवाई को रोकने का फैसला लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। ट्रम्प का कहना है कि दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान की दिशा में यह एक जरूरी कदम है।
यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को टालने की बात कही हो। इससे पहले भी वे ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमलों की योजना को स्थगित करने का संकेत दे चुके हैं। अब एक बार फिर इस फैसले को आगे बढ़ाते हुए नई समयसीमा तय की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की अटकलें तेज हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा और निर्णय सही दिशा में आगे बढ़ते हैं तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, क्षेत्र में पहले से मौजूद राजनीतिक और सैन्य जटिलताओं के चलते स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत और आने वाले दिनों में लिए जाने वाले निर्णयों पर टिकी हुई हैं। ऊर्जा सुरक्षा, तेल व्यापार और भू-राजनीतिक स्थिरता को लेकर यह घटनाक्रम वैश्विक बाजारों पर भी असर डाल सकता है।

