वनइंडिया शुरू करने जा रहा है ऐतिहासिक सर्वेक्षण, सरकारों के गवर्नेंस पर देश के असली मूड का होगा खुलासा
नई दिल्ली, 21 मई 2025 — देश की राजनीति में एक बड़ा और अहम कदम उठाया जा रहा है। वनइंडिया (OneIndia) जल्द ही एक बहुभाषी और बहुस्तरीय सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य है — 2024 विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता में आई सरकारों के पहले वर्ष के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना और जानना कि देश की जनता अपनी सरकारों के बारे में क्या सोचती है। इस सर्वेक्षण को Political Vibe के सहयोग से डिजाइन और क्रियान्वित किया जा रहा है, जो राजनीतिक डेटा एनालिसिस के क्षेत्र में जाना-माना नाम है। यह केवल एक सामान्य सर्वे नहीं होगा, बल्कि देश के जनमत का गहराई से विश्लेषण करने वाला, प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन होगा।
सरकारों के एक साल बाद: क्यों है यह सर्वे जरूरी?
2024 में कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन हुआ था। नए मुख्यमंत्री बने, नए वादे किए गए, नई नीतियां बनाई गईं। अब जब उन सरकारों को एक वर्ष हो चुका है, यह समय है एक "जनता की परीक्षा" का। सरकारों के प्रदर्शन का मूल्यांकन केवल चुनावी वादों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रह सकता। जनता आज जागरूक है, इंटरनेट-साक्षर है, और अपने अधिकारों और उम्मीदों को लेकर पहले से कहीं ज्यादा सजग है। ऐसे में वनइंडिया का यह सर्वे आंकड़ों के माध्यम से जनता की सोच को सामने लाएगा, न कि केवल अटकलों या धारणाओं पर आधारित खबरों के जरिए।
क्या है इस सर्वे की खासियत?
इस सर्वे की सबसे बड़ी खासियत है इसका विस्तृत और विविधतापूर्ण डिजाइन। इसे खासतौर पर इस तरह से बनाया गया है कि यह भारत की भाषाई, सामाजिक, आर्थिक और क्षेत्रीय विविधताओं को पूरी तरह से समाहित कर सके।
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों दोनों को शामिल किया जाएगा
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जाति, वर्ग, लिंग और आयु वर्ग के हिसाब से आंकड़े जुटाए जाएंगे
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हर राज्य की जनता की अलग-अलग राय को विश्लेषित किया जाएगा
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सर्वे हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, गुजराती जैसी प्रमुख भाषाओं में किया जाएगा
इस तरह यह सर्वे न केवल एक राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य देगा, बल्कि स्थानीय मानसिकता और मुद्दों को भी समझने में मदद करेगा।
मुख्य फोकस: "गवर्नेंस" यानी सुशासन
इस सर्वे का केंद्र बिंदु केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि सरकार का वास्तविक प्रदर्शन होगा। राजनीति अब केवल वादों तक सीमित नहीं रह गई है। लोग चाहते हैं:
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वादों को ज़मीन पर उतारने की क्षमता
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प्रशासन की तत्परता और पारदर्शिता
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इन्फ्रास्ट्रक्चर का सुधार और विकास
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कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच और प्रभाव
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नेताओं की विश्वसनीयता और जवाबदेही
"गवर्नेंस" ही आज की राजनीति की धुरी बन चुकी है, और यही इस सर्वे की आत्मा है।
प्रदर्शन बनाम लोकप्रियता: बदलता जनमानस
यह सर्वे यह बताने में सक्षम होगा कि क्या जनता अब भी सिर्फ किसी पार्टी या चेहरे की लोकप्रियता के आधार पर वोट दे रही है या अब प्रदर्शन को ज्यादा तवज्जो मिल रही है? बहुत से मतदाता अब यह सोचने लगे हैं कि यदि सरकारें अपेक्षित प्रदर्शन नहीं करतीं, तो वे अपना वोट का रुख बदलने में संकोच नहीं करेंगे। ऐसे में वनइंडिया का यह सर्वे भविष्य के 2025, 2026 और उसके बाद होने वाले चुनावों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण संकेत देगा।
सर्वे के पहले चरण में किन राज्यों पर फोकस होगा?
सर्वे का पहला चरण उन राज्यों पर केंद्रित होगा जहां 2024 में सत्ता परिवर्तन हुआ था। इन राज्यों में नई सरकारों ने अपने पहले वर्ष में क्या किया, किस हद तक वादों को पूरा किया और जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे या नहीं — यह सब इस सर्वे के जरिए सामने आएगा। इससे इन राज्यों की "गवर्नेंस रिपोर्ट कार्ड" तैयार की जाएगी, जिसमें आंकड़ों के साथ जनता की राय और अनुभवों को भी शामिल किया जाएगा।
वनइंडिया की भूमिका: हर भाषा, हर आवाज़ तक पहुंच
वनइंडिया लंबे समय से भारत की बहुभाषी समाचार संस्कृति का सशक्त प्रतिनिधि रहा है। यह सर्वे भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा, जहां हर क्षेत्र, हर राज्य और हर वर्ग की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी भाषा में प्रस्तुत की जाएगी। हर रिपोर्ट में केवल डेटा ही नहीं होंगे, बल्कि एक स्पष्ट कथा (narrative) होगी — कि लोग अपने नेताओं और सरकारों से क्या सोचते हैं, क्या उम्मीदें रखते हैं, और क्या वे निराश हैं या संतुष्ट।
Political Vibe: डेटा की सटीकता की गारंटी
इस सर्वे को तकनीकी रूप से संभव बना रहा है Political Vibe का अनुभवी एनालिटिक्स टीम। यह टीम वर्षों से राजनीतिक रुझानों और जनमत विश्लेषण में सक्रिय रही है और डेटा की विश्वसनीयता इसकी सबसे बड़ी ताकत है। Political Vibe इस सर्वे को वैज्ञानिक और सांख्यिकीय तरीकों से लागू करेगा, जिससे आंकड़े न केवल सटीक होंगे बल्कि प्रासंगिक और भरोसेमंद भी होंगे।
क्या असर डालेगा यह सर्वे भविष्य की राजनीति पर?
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राजनीतिक दलों को जनता की प्राथमिकताओं और नाराजगी का अंदाज़ा लगेगा
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शासन प्रणाली को जनता के अनुभवों के आधार पर परखने का मौका मिलेगा
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मीडिया और नागरिक समाज को प्रदर्शन आधारित चर्चा को बढ़ावा मिलेगा
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मतदाताओं को अपनी राय और अनुभव साझा करने का मंच मिलेगा
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चुनावी रणनीति और नीति निर्माण में जमीनी हकीकत पर आधारित सुधार संभव होंगे
यह सिर्फ सर्वे नहीं लोकतंत्र की आवाज़
वनइंडिया का यह सर्वे एक ऐसा प्रयास है जो केवल सरकारों का मूल्यांकन नहीं करता, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की गहराइयों में जाकर जनमत को उभारता है। इसमें नारे, प्रचार और आस्था नहीं, बल्कि तथ्य, अनुभव और आंकड़े हैं। यह सर्वे उन वोटरों की आवाज़ है जो टीवी डिबेट्स में नहीं आते, जो सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं, लेकिन जिनकी उंगली मतदान केंद्र पर लोकतंत्र की दिशा तय करती है। वनइंडिया और Political Vibe का यह संयुक्त प्रयास आने वाले समय में भारत की राजनीतिक जागरूकता और उत्तरदायित्व की संस्कृति को और मजबूत बनाएगा।

