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नेपाल में बड़ा राजनीतिक भूचाल, फुटेज में देंखे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार

नेपाल में बड़ा राजनीतिक भूचाल, फुटेज में देंखे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार

नेपाल की राजनीति में शनिवार सुबह उस समय बड़ा हड़कंप मच गया जब पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli और पूर्व गृह मंत्री Ramesh Lekhak को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई पिछले वर्ष हुए “जेन-जी प्रोटेस्ट” मामले से जुड़ी जांच के तहत की गई है, जिसने उस समय देशभर में राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर दी थी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार सुबह भक्तपुर के गुंडु स्थित उनके निजी आवास से हिरासत में लिया गया। वहीं, रमेश लेखक को सुबह करीब 5 बजे सूर्यविनायक इलाके से गिरफ्तार किया गया। दोनों नेताओं को अलग-अलग टीमों द्वारा समन्वित ऑपरेशन के तहत पकड़ा गया।

यह गिरफ्तारी उस समय हुई है जब नेपाल की राजनीति पहले से ही बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। कल ही काठमांडू के मेयर Balen Shah ने नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है, जिससे देश की सत्ता संरचना में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई गृह मंत्रालय की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच के आधार पर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पिछले वर्ष हुए जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रशासनिक लापरवाही और निर्णय लेने में गंभीर चूक हुई थी, जिसके चलते स्थिति बिगड़ गई थी।

एक उच्चस्तरीय जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया था कि इस मामले में जिम्मेदार नेताओं पर कानूनी कार्रवाई की जाए। आयोग का मानना था कि प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रमों में प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई थी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में दोष साबित होने पर संबंधित आरोपियों को अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है। हालांकि, अभी तक किसी भी आरोपी को अदालत में दोषी नहीं ठहराया गया है और आगे की जांच जारी है।

गिरफ्तारी के बाद राजधानी काठमांडू और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया है ताकि किसी भी संभावित विरोध प्रदर्शन या तनावपूर्ण स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी को लेकर समर्थकों और विपक्षी दलों में तीखी प्रतिक्रिया देखने की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल, सरकार की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जांच पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है और किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होगा। वहीं, देशभर में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और आगे के राजनीतिक घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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