प्रदेश में चल रही रबी विपणन सीजन के तहत गेहूं खरीद प्रक्रिया को तेज करने पर सरकार और प्रशासन ने विशेष जोर दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसानों को उनकी उपज का समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए और खरीदे गए गेहूं का उठाव बिना किसी देरी के किया जाए, ताकि मंडियों में जाम की स्थिति उत्पन्न न हो और किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
राज्य के कई जिलों में गेहूं की आवक लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते खरीद केंद्रों पर दबाव भी बढ़ गया है। किसानों की शिकायत रही है कि कई जगहों पर तौल में देरी, भुगतान में विलंब और उठाव की धीमी प्रक्रिया के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए संबंधित विभागों ने सभी खरीद एजेंसियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और किसान हितैषी बनाया जाए।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार इस बार लक्ष्य रखा गया है कि हर किसान से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं की खरीद सुनिश्चित की जाए और भुगतान की प्रक्रिया अधिकतम 48 घंटे के भीतर पूरी कर दी जाए। इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को और मजबूत किया गया है, जिससे किसानों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की जा सके।
इसके साथ ही मंडियों में गेहूं के भंडारण और उठाव की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन ने परिवहन एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से उठाव सुनिश्चित करें, ताकि खरीद केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ न हो। कई जिलों में अतिरिक्त भंडारण स्थान भी चिन्हित किए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में अनाज का सुरक्षित भंडारण किया जा सके।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने के कारण गेहूं की पैदावार अच्छी हुई है, जिससे खरीद केंद्रों पर आवक बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
किसानों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही यह मांग की है कि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि कई बार टोकन व्यवस्था और तौल मशीनों की धीमी गति के कारण समय अधिक लगता है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाएगा और किसी भी किसान को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं, जहां किसान अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
कुल मिलाकर सरकार का फोकस इस समय गेहूं खरीद प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने पर है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का सही और समय पर लाभ मिल सके।

