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सतत विकास लक्ष्यों के साथ योजनाओं का समन्वय जरूरी: एन. विजयलक्ष्मी

सतत विकास लक्ष्यों के साथ योजनाओं का समन्वय जरूरी: एन. विजयलक्ष्मी

योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा है कि राज्य की विकास योजनाओं का सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के साथ समन्वय अत्यंत आवश्यक है। इससे समावेशी, सतत और संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

वे गुरुवार को सतत विकास लक्ष्य (SDG) पर आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय कार्यशाला के समापन सत्र को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने विकास योजनाओं को प्रभावी बनाने और उनके परिणामों को बेहतर करने के लिए विभिन्न सुझाव भी साझा किए।

डॉ. विजयलक्ष्मी ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन के साथ विकास की दिशा में काम करना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप योजनाओं का निर्माण और क्रियान्वयन राज्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भी भाग लिया और अपने विचार रखे। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि अगर योजनाओं को सही तरीके से एसडीजी के साथ जोड़ा जाए, तो न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि विकास के परिणाम भी अधिक प्रभावी होंगे।

अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। इसके साथ ही डेटा आधारित योजना निर्माण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।

डॉ. विजयलक्ष्मी ने यह भी कहा कि विकास योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करना ही असली लक्ष्य होना चाहिए। इससे आम जनता तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंच सकेगा।

कुल मिलाकर, सतत विकास लक्ष्य पर आयोजित यह कार्यशाला राज्य के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। इसमें दिए गए सुझाव और विचार आने वाले समय में विकास योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक साबित होंगे।

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