वीडियो में जाने CBI ने अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ 2,220 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने गुरुवार को अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के खिलाफ एक नया धोखाधड़ी मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ कुल 2,220 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी की है।
सूत्रों के अनुसार, बैंक की शिकायत के बाद CBI ने मामले की जांच तेज कर दी। गुरुवार को एजेंसी ने अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास और RCom के दफ्तर पर छापेमारी की। इस दौरान लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जो मामले की जांच में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
छापेमारी के दौरान CBI ने बताया कि सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है और आगे की कानूनी कार्रवाई इसी आधार पर तय की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इससे पहले, अनिल अंबानी ने गुरुवार को ईडी (Enforcement Directorate) के सामने एक अन्य मामले में पेश होकर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई थी। यह लगातार बढ़ती कानूनी परेशानियों का हिस्सा है, जिसमें अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर विभिन्न वित्तीय और आर्थिक मामलों में जांच चल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ 2,220 करोड़ रुपए से अधिक की कथित धोखाधड़ी, भारत के कॉर्पोरेट और बैंकिंग क्षेत्र में गंभीर चिंता का विषय है। इस मामले की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोन और वित्तीय लेन-देन में नियमों का कितना पालन हुआ और किस हद तक कथित अनियमितता हुई।
वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में CBI और ED दोनों एजेंसियों की जांच अक्सर लंबी और जटिल होती है। इसके पीछे कारण है कि धोखाधड़ी के दस्तावेज़ और ट्रांजैक्शन कई सालों पुराने होते हैं और इनके पीछे कई कंपनियां और बैंकिंग संस्थान जुड़े होते हैं।
इस मामले में अनिल अंबानी और RCom के अधिकारी अभी बयान देने और दस्तावेज़ पेश करने के लिए CBI के समक्ष पेश होंगे। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बैंक के पैसों का हानि या दुरुपयोग कैसे हुआ और कौन-कौन इसके लिए जिम्मेदार है।
कुल मिलाकर, अनिल अंबानी और रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ CBI का यह नया मामला भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर और बैंकिंग क्षेत्र में नियंत्रण और पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण संकेत देता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस जांच की दिशा में कौन-कौन से नए तथ्य और दस्तावेज सामने आते हैं और इसकी कानूनी प्रक्रिया किस प्रकार आगे बढ़ती है।

