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Vidhu Vinod Chopra Birthday: पहली फिल्म पर मिला National Award, अमिताभ को दी करोड़ों की कार; ऐसी रही विधु विनोद चोपड़ा की जिंदगी
 

Vidhu Vinod Chopra Birthday: पहली फिल्म पर मिला National Award, अमिताभ को दी करोड़ों की कार; ऐसी रही विधु विनोद चोपड़ा की जिंदगी

हिंदी सिनेमा में अपनी अलग तरह की कहानियों और दमदार फिल्ममेकिंग के लिए पहचान बनाने वाले विधु विनोद चोपड़ा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। करीब पांच दशक से फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय विधु ने बतौर निर्देशक और निर्माता कई यादगार फिल्में दी हैं। हालांकि, उनकी जिंदगी का सफर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। निजी जिंदगी से लेकर करियर के उतार-चढ़ाव तक, उनकी कहानी में कई ऐसे किस्से हैं जो अक्सर चर्चा में रहे हैं।

पहली ही फिल्म के लिए मिला नेशनल अवॉर्ड
विधु विनोद चोपड़ा का जन्म 5 सितंबर 1952 को श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर में हुआ था। शुरुआत से ही उन्हें फिल्में बनाने का जुनून था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शॉर्ट फिल्म 'मर्डर एट मंकी हिल' से की।
साल 1976 में बनी इस फिल्म के लिए विधु को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। खास बात यह है कि यह सम्मान उन्हें उनके करियर की शुरुआत में ही मिल गया था। पुरस्कार के साथ उन्हें 4 हजार रुपये की राशि भी मिली थी।
दूसरी शॉर्ट फिल्म पहुंची ऑस्कर तक
विधु की अगली शॉर्ट फिल्म 'एन एनकाउंटर विद फेसेस' भी काफी चर्चित हुई। फिल्म को बेस्ट डॉक्यूमेंट्री कैटेगरी में ऑस्कर के लिए नॉमिनेशन मिला था।
शुरुआती दौर में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने के बावजूद विधु का आगे का सफर आसान नहीं रहा।

पहली फीचर फिल्म फ्लॉप हुई तो टूट गए थे विधु
शॉर्ट फिल्मों की सफलता के बाद विधु ने फीचर फिल्म की दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली फीचर फिल्म 'सजा ए मौत' बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी।

इस असफलता का विधु पर गहरा असर पड़ा। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस दौर में वह इतने निराश हो गए थे कि उनके मन में आत्महत्या जैसे विचार तक आने लगे थे। हालांकि, उन्होंने इस मुश्किल दौर से खुद को बाहर निकाला और फिल्ममेकिंग जारी रखी।
'परिंदा' ने बदल दी करियर की दिशा
विधु विनोद चोपड़ा को बड़ी पहचान साल 1989 में आई फिल्म 'परिंदा' से मिली। अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ, नाना पाटेकर और अनुपम खेर जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म दर्शकों के साथ-साथ आलोचकों को भी काफी पसंद आई।

इसके बाद विधु ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान कायम की।
'3 Idiots' से '12th Fail' तक बनाई खास पहचान
निर्देशक और निर्माता के तौर पर विधु विनोद चोपड़ा ने कई चर्चित फिल्मों से दर्शकों के बीच जगह बनाई। उनकी फिल्मोग्राफी में 'मुन्नाभाई एमबीबीएस', '3 इडियट्स', 'पीके', 'संजू' और '12th फेल' जैसी फिल्में शामिल हैं।

इन फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, रिश्तों और युवाओं से जुड़े विषयों को भी अलग अंदाज में पेश किया गया।


अमिताभ बच्चन को गिफ्ट की थी करोड़ों की कार
विधु विनोद चोपड़ा और अमिताभ बच्चन के बीच भी एक खास प्रोफेशनल रिश्ता रहा है। दोनों ने साल 2007 में फिल्म 'एकलव्य' में साथ काम किया था।
विधु ने एक बातचीत में बताया था कि अमिताभ बच्चन ने फिल्म के लिए फीस नहीं ली थी। इसके बाद उन्होंने बिग बी को करीब 4 करोड़ रुपये कीमत की रोल्स रॉयस कार गिफ्ट की थी।

महंगी कार देने पर मां ने लगा दिए थे तमाचे
इस किस्से का सबसे दिलचस्प हिस्सा विधु की मां की प्रतिक्रिया थी। उनके मुताबिक, जब उनकी मां को पता चला कि उन्होंने अमिताभ बच्चन को करोड़ों रुपये की कार गिफ्ट की है, तो वह नाराज हो गईं।
विधु ने बताया था कि उस समय वह खुद मारुति वैन चलाते थे, जबकि उन्होंने अमिताभ बच्चन को इतनी महंगी कार गिफ्ट कर दी थी। इस बात पर उनकी मां ने उन्हें डांटने के साथ कथित तौर पर कई तमाचे भी लगाए थे।
विधु विनोद चोपड़ा ने की तीन शादियां
फिल्मों के अलावा विधु विनोद चोपड़ा की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही है। उन्होंने अपने जीवन में तीन शादियां कीं।
उनकी पहली शादी फिल्म एडिटर रेनू सलूजा से 1976 में हुई थी। दोनों का रिश्ता लंबे समय तक नहीं चला और 1983 में दोनों अलग हो गए।
इसके बाद विधु ने 1985 में शबनम सुखदेव से दूसरी शादी की। यह रिश्ता भी ज्यादा लंबा नहीं चला और 1989 में दोनों का तलाक हो गया।
इसके बाद 1990 में विधु विनोद चोपड़ा ने पत्रकार और लेखिका अनुपमा चोपड़ा से शादी की। दोनों आज भी साथ हैं। उनके दो बच्चे हैं—बेटी ज़ूनी चोपड़ा और बेटा अग्नि देव चोपड़ा।

उतार-चढ़ाव के बाद बनाई अपनी अलग पहचान
विधु विनोद चोपड़ा की कहानी बताती है कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता हमेशा सीधी राह से नहीं मिलती। पहली ही शॉर्ट फिल्म पर राष्ट्रीय सम्मान पाने वाले इस फिल्ममेकर को अपनी पहली फीचर फिल्म की असफलता के बाद बेहद कठिन दौर से गुजरना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

आज उनकी पहचान ऐसे फिल्ममेकर के तौर पर होती है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में अलग विषयों और मजबूत कहानियों को बड़े पर्दे तक पहुंचाया और कई यादगार फिल्मों के जरिए अपनी खास जगह बनाई।
 

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