मोहम्मद रफी को जिस गाने ने दिलाया था पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड, आज भी हर हिंदुस्तानी की जुबां पर है यह गीत
हिंदी सिनेमा के महानतम गायकों में शामिल मोहम्मद रफी की आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। उनकी मधुर आवाज, भावनाओं से भरपूर गायकी और हर तरह के गीतों को अपनी शैली में ढालने की क्षमता ने उन्हें संगीत की दुनिया में अमर बना दिया। अपने लंबे करियर में उन्होंने हजारों गाने गाए, लेकिन उनके सफर में एक ऐसा गीत भी आया, जिसने उन्हें देश का प्रतिष्ठित नेशनल अवॉर्ड दिलाया।
यह गीत था "क्या हुआ तेरा वादा", जिसे साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म 'हम किसी से कम नहीं' के लिए मोहम्मद रफी ने अपनी आवाज दी थी। इस गाने की लोकप्रियता इतनी ज्यादा रही कि इसे सुनने वाले हर वर्ग के लोगों ने पसंद किया। रफी साहब की भावपूर्ण गायकी ने इस गीत को यादगार बना दिया और इसी के लिए उन्हें बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला था।
मोहम्मद रफी के लिए यह सम्मान बेहद खास था, क्योंकि यह उनके शानदार करियर का पहला और आखिरी नेशनल अवॉर्ड साबित हुआ। हालांकि, उन्होंने अपने जीवन में कई बड़े सम्मान और पुरस्कार हासिल किए, लेकिन नेशनल अवॉर्ड का यह पल उनके संगीत सफर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा।
"क्या हुआ तेरा वादा" गाने को संगीतकार आरडी बर्मन ने संगीत दिया था, जबकि इसके बोल मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। इस गाने में प्यार, इंतजार और दर्द की भावनाओं को जिस खूबसूरती से पेश किया गया, वह आज भी श्रोताओं को भावुक कर देता है।
मोहम्मद रफी का करियर करीब चार दशकों तक फैला रहा। उन्होंने रोमांटिक, देशभक्ति, भक्ति, शास्त्रीय और कॉमेडी हर तरह के गीतों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने राज कपूर, दिलीप कुमार, देव आनंद, शम्मी कपूर, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कई बड़े सितारों के लिए अपनी आवाज दी।
रफी साहब की खासियत यह थी कि वह हर अभिनेता की स्क्रीन पर्सनैलिटी के हिसाब से अपनी आवाज को ढाल लेते थे। यही वजह थी कि उन्हें हिंदी फिल्म संगीत का सबसे बहुमुखी गायकों में गिना जाता है।
31 जुलाई 1980 को मोहम्मद रफी का निधन हो गया, लेकिन उनकी आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है। "क्या हुआ तेरा वादा" जैसे गीत उनकी अमर विरासत का हिस्सा हैं, जिन्हें आज भी लोग सुनते हैं और उनकी गायकी को याद करते हैं।
मोहम्मद रफी को मिला यह नेशनल अवॉर्ड इस बात का प्रमाण है कि उनकी आवाज सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं थी, बल्कि वह भावनाओं को महसूस कराने वाली एक ऐसी कला थी, जो पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी।

