'सोनम वांगचुक के आंदोलन का इस्तेमाल हो रहा है', वीडियो में जाने कॉकरोच जनता पार्टी पर भड़कीं श्वेता तिवारी
सोशल मीडिया पर इन दिनों चर्चा में बनी कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने अपनी स्पष्ट राय रखी है। जहां कुछ बॉलीवुड हस्तियां इस पार्टी के समर्थन में नजर आ रही हैं, वहीं श्वेता तिवारी ने पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह इसका समर्थन नहीं करतीं। उनका आरोप है कि पार्टी सोनम वांगचुक के आंदोलन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है।
इंस्टाग्राम पर साझा की अपनी बात
श्वेता तिवारी ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि सोनम वांगचुक एक महत्वपूर्ण और ईमानदार उद्देश्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं।उन्होंने लिखा कि वांगचुक की लड़ाई शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़ी है और इस मुद्दे पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
"सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए"
अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में कहा कि सोनम वांगचुक द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।उनका मानना है कि शिक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़े विषयों पर सकारात्मक संवाद होना जरूरी है और सरकार को उनकी चिंताओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कॉकरोच जनता पार्टी से बनाई दूरी
श्वेता तिवारी ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट किया कि उनका कॉकरोच जनता पार्टी से कोई संबंध नहीं है और वह इसका समर्थन नहीं करती हैं।उन्होंने लिखा कि जिस तरीके से यह पार्टी पूरे मुद्दे को संभाल रही है, उससे वह सहमत नहीं हैं।
"राजनीतिक एजेंडे के लिए हो रहा इस्तेमाल"
अपने बयान में अभिनेत्री ने आरोप लगाया कि उन्हें लगता है कि पार्टी सोनम वांगचुक के आंदोलन का उपयोग अपने राजनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है।उन्होंने कहा कि किसी सामाजिक या जनहित के आंदोलन को राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है और वह इस तरीके का समर्थन नहीं करतीं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
श्वेता तिवारी की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग उनकी राय का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स इससे असहमति भी जता रहे हैं।फिलहाल, श्वेता तिवारी का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक व मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। उनके इस बयान ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सामाजिक आंदोलनों और राजनीतिक अभियानों के बीच संतुलन किस तरह बनाए रखा जाना चाहिए।

