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शूटिंग पर आशा पारेख का मेकअप करती थीं गीता बाली, शम्मी कपूर के सामने जताई थी उन्हें गोद लेने की इच्छा

मुंबई, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री आशा पारेख के फिल्मी करियर से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को उनकी तरफ खींचते हैं। तमाम किस्सों में एक किस्सा दिग्गज एक्ट्रेस गीता बाली से जुड़ा है। आशा पारेख ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'द हिट गर्ल' में बताया कि गीता बाली उन्हें इतना पसंद करती थीं कि एक समय उन्होंने उन्हें गोद लेने की इच्छा तक जाहिर कर दी थी। यह बात उस दौर की है, जब वह इंडस्ट्री में नई थीं और शम्मी कपूर के साथ अपनी शुरुआती बड़ी फिल्मों में काम कर रही थीं।

मुंबई, 1 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री आशा पारेख के फिल्मी करियर से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को उनकी तरफ खींचते हैं। तमाम किस्सों में एक किस्सा दिग्गज एक्ट्रेस गीता बाली से जुड़ा है। आशा पारेख ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'द हिट गर्ल' में बताया कि गीता बाली उन्हें इतना पसंद करती थीं कि एक समय उन्होंने उन्हें गोद लेने की इच्छा तक जाहिर कर दी थी। यह बात उस दौर की है, जब वह इंडस्ट्री में नई थीं और शम्मी कपूर के साथ अपनी शुरुआती बड़ी फिल्मों में काम कर रही थीं।

आशा पारेख जब पांचवीं क्लास में थी, तब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। बिमल रॉय की फिल्म 'मां' में उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम किया था। हालांकि, उनका असली स्टारडम तब शुरू हुआ, जब साल 1959 में वह फिल्म 'दिल देके देखो' में शम्मी कपूर के साथ लीड रोल में नजर आईं। यह फिल्म उनके करियर के लिए बेहद खास साबित हुई और इसी दौरान उनका शम्मी कपूर के परिवार से भी एक खास रिश्ता बना।

'दिल देके देखो' की शूटिंग के दौरान आशा की मुलाकात शम्मी कपूर की पत्नी और मशहूर एक्ट्रेस गीता बाली से हुई। आशा पारेख उस समय इंडस्ट्री में नई थीं जबकि गीता बाली पहले से ही अपनी पहचान बना चुकी थीं। आशा ने अपनी किताब में बताया कि गीता बाली उनके साथ बेहद प्यार से पेश आती थीं।

'द हिट गर्ल' में आशा पारेख ने बताया कि रानीखेत में 'दिल देके देखो' की शूटिंग के पहले दिन गीता बाली ने उनका मेकअप किया था। उस समय यह उनके लिए बड़ी बात थी। इंडस्ट्री में नई होने के कारण गीता बाली ने उन्हें शूटिंग के माहौल और काम करने के तरीके को समझने में मदद की। धीरे-धीरे दोनों के बीच एक प्यारा रिश्ता बन गया।

रिश्ते में इतना अपनापन हो गया कि गीता बाली ने एक समय आशा को गोद लेने की इच्छा तक जता दी। उन्होंने शम्मी कपूर के सामने यह बात कही थी। यह किस्सा आशा पारेख की जिंदगी की सबसे दिलचस्प यादों में गिना जाता है। आशा पारेख ने अपनी आत्मकथा में बताया कि वह शम्मी कपूर को 'चाचा' और गीता बाली को 'चाची' कहकर बुलाती थीं।

आशा पारेख के करियर की बात करें तो 'दिल देके देखो' के बाद उनके पास फिल्मों की कमी नहीं रही। वह 1960 और 1970 के दशक की सबसे लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। 'जब प्यार किसी से होता है', 'फिर वही दिल लाया हूं', 'तीसरी मंजिल', 'प्यार का मौसम', 'कटी पतंग' और 'कारवां' जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों के बीच खास पहचान दिलाई।

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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