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सतीश कौशिक की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने दी नम आंखों से श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता व निर्देशक सतीश कौशिक आज भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं है, लेकिन वे अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में खास पहचान रखते हैं। सोमवार को उनकी पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनके करीबी दोस्त और उनके सह-कलाकार जैकी श्रॉफ ने उन्हें याद किया।
सतीश कौशिक की पुण्यतिथि पर जैकी श्रॉफ ने दी नम आंखों से श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 9 मार्च (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता व निर्देशक सतीश कौशिक आज भले ही हमारे बीच मौजूद नहीं है, लेकिन वे अपनी फिल्मों के जरिए लोगों के दिलों में खास पहचान रखते हैं। सोमवार को उनकी पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनके करीबी दोस्त और उनके सह-कलाकार जैकी श्रॉफ ने उन्हें याद किया।

अभिनेता व निर्देशक सतीश कौशिक ने अपनी कॉमेडी, निर्देशन और अभिनय से लाखों लोगों को हंसाया और भावुक किया। उनकी पुण्यतिथि पर जैकी ने याद करते हुए इंस्टाग्राम स्टोरीज सेक्शन पर सतीश की तस्वीर शेयर की। इसके साथ उन्होंने लिखा, "सतीश जी की डेथ एनिवर्सरी पर हम उन्हें याद करते हैं।"

सतीश कौशिक और जैकी श्रॉफ बहुत अच्छे दोस्त और सह-कलाकार भी थे। दोनों ने बॉलीवुड में कई फिल्मों में साथ काम किया है, जिनमें से कुछ प्रमुख फिल्मों में 1990 के दशक की 'पुलिस ऑफिसर' (1992) और 'तलाशी' (1996) शामिल हैं। इसके अलावा, वे 'बैंडिश' (1996) जैसी अन्य फिल्मों में भी नजर आए थे।

सतीश ने हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्मों में काम किया। उन्होंने 'तेरे नाम', 'बादल', 'रोका', 'साजन चले ससुराल' जैसी हिट फिल्मों में काम किया है, लेकिन दर्शकों के बीच उन्होंने 'मिस्टर इंडिया' में 'कैलेंडर' के किरदार से खास पहचान बनाई थी। वहीं, 'राम लखन' में 'पप्पू पेजर' का रोल भी लोगों को आज भी याद है।

इन फिल्मों के लिए मिला बेस्ट कॉमेडियन का अवॉर्ड फिल्म ‘राम-लखन’ (1989) और ‘साजन चले ससुराल’ (1996) के लिए सतीश को दो बार बेस्ट कॉमेडियन का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। अभिनेता के अलावा वे डायरेक्टर-प्रोड्यूसर भी थे। कई फिल्मों में एक्टिंग कर चुके सतीश को उनके फनी डायलॉग्स के लिए भी जाना जाता है।

उन्होंने 1983 में फिल्म मासूम से बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर करियर की शुरुआत की और साथ ही, फिल्म में अभिनय भी किया था। फिर, अभिनेता की बतौर निर्देशक पहली फिल्म 'रूप की रानी चोरों का राजा' थी। सलमान खान की 'तेरे नाम' (2003) उनके करियर की सबसे सफल निर्देशित फिल्म रही थी।

इसके अलावा, उन्होंने 'जाने भी दो यारों' (1983) के संवाद लिखे और उन्होंने ओटीटी, टीवी व रंगमंच पर भी काम किया।

--आईएएनएस

एनएस/पीयूष

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