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Sanjay Dutt Marathi Controversy: जेल में भी नहीं सीखी मराठी, पूर्व जेल अधिकारी ने बताया कैसे सुधरी थी संजू बाबा की अकड़

Sanjay Dutt Marathi Controversy: जेल में भी नहीं सीखी मराठी, पूर्व जेल अधिकारी ने बताया कैसे सुधरी थी संजू बाबा की अकड़


महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर बहस और विवाद अक्सर देखने को मिलता है. हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त भी इसी मुद्दे को लेकर चर्चा में आ गए. मुंबई में आयोजित एक दही हांडी कार्यक्रम में संजय दत्त महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के साथ मौजूद थे. कार्यक्रम के दौरान जब संजय दत्त हिंदी में बात करने लगे तो मंत्री ने उन्हें मराठी में बोलने के लिए कहा.

संजय दत्त ने इस पर मराठी में बात करने से इनकार करते हुए अपने जेल के दिनों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह करीब पांच साल जेल में रहे, लेकिन तब भी मराठी नहीं सीख पाए. उनके इस बयान के बाद अब महाराष्ट्र जेल विभाग की पूर्व अधिकारी स्वाति साठे का पुराना किस्सा चर्चा में आ गया है.

संजय दत्त को कितनी हुई थी सजा?
संजय दत्त को मुंबई की विशेष टाडा अदालत ने अवैध हथियार रखने के मामले में छह साल की सजा सुनाई थी. मामला उस हथियार से जुड़ा था जो मुंबई में अवैध हथियारों की खेप के साथ पहुंचा था.

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा को घटाकर पांच साल कर दिया. पैरोल, फर्लो और अन्य कानूनी रियायतों को शामिल करने के बाद संजय दत्त ने जेल में चार साल से कुछ अधिक समय बिताया.

जेल में उनके आसपास बड़ी संख्या में मराठी बोलने वाले कैदी और कर्मचारी मौजूद थे, लेकिन इसके बावजूद संजय दत्त ज्यादातर बातचीत हिंदी में ही करते थे.

जेल में मराठी नहीं, कुछ और सीखा!
महाराष्ट्र जेल विभाग की पूर्व डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल स्वाति साठे ने संजय दत्त के जेल के दिनों से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा किया था. उनके मुताबिक संजय दत्त ने जेल में भले ही मराठी भाषा नहीं सीखी, लेकिन शुरुआत में उनका रवैया ऐसा था कि उन्हें जेल के सख्त नियमों के मुताबिक ढालना जरूरी हो गया था.
जेल पहुंचने के शुरुआती दिनों में संजय दत्त मानसिक रूप से काफी परेशान थे. वह जेल के माहौल को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे. बताया जाता है कि पहली बार जेल पहुंचने पर उन्होंने जेल की निर्धारित यूनिफॉर्म पहनने में भी आनाकानी की.

जब जेल अधिकारी ने लगा दी फटकार
संजय दत्त के व्यवहार की जानकारी जेल अधिकारियों ने स्वाति साठे तक पहुंचाई. साठे जेल में अनुशासन को लेकर काफी सख्त मानी जाती थीं. जब उन्हें संजय दत्त के रवैये के बारे में पता चला तो वह सीधे उनकी बैरक में पहुंच गईं.
उन्होंने संजय दत्त को सख्त लहजे में जेल के नियमों का पालन करने के लिए कहा. उनके कड़े रुख के बाद संजय दत्त ने विवाद बढ़ाने के बजाय जेल के नियमों का पालन करना ही उचित समझा.

इसके बाद उन्होंने चेंजिंग रूम में जाकर जेल की यूनिफॉर्म पहन ली. यह घटना उनके जेल जीवन के शुरुआती दिनों की सबसे चर्चित यादों में शामिल हो गई.
बाद में जेल अधिकारियों से बन गए अच्छे संबंध
शुरुआत में सख्त रवैये का सामना करने के बाद संजय दत्त के जेल अधिकारियों के साथ संबंध धीरे-धीरे बेहतर होते गए. बाद में उन्होंने जेल में आयोजित कई गतिविधियों में सहयोग किया.

संजय दत्त ने अपनी फिल्मों से प्रेरणा लेते हुए जेल में रेडियो से जुड़ी गतिविधियों में भी योगदान दिया. इस दौरान उनका व्यवहार पहले की तुलना में काफी बदल गया था और वह जेल के माहौल में खुद को ढालने लगे थे.
मराठी सीखने की डेडलाइन को लेकर भी हुआ था विवाद
संजय दत्त का बयान ऐसे समय में सामने आया जब महाराष्ट्र में टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही थी.
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए 15 अगस्त तक की समयसीमा देने की बात कही थी. साथ ही यह भी कहा गया था कि नियम का पालन नहीं करने वालों के परमिट पर कार्रवाई की जा सकती है.
इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भाषा को लेकर बहस तेज हो गई. हिंदी भाषी लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस फैसले को एक साल के लिए टालने की बात कही.
संजय दत्त के बयान ने फिर गरमा दिया भाषा विवाद
ऐसे माहौल में संजय दत्त का मंच से मराठी न बोलने वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में आ गया. हालांकि उनका बयान अपने जेल के अनुभव से जुड़ा था, लेकिन महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रही बहस के बीच इसने एक बार फिर मराठी बनाम हिंदी की चर्चा को हवा दे दी.
संजय दत्त का जेल का यह पुराना किस्सा भी इसी वजह से चर्चा में है कि जहां उन्होंने जेल में कई साल बिताए, वहीं वहां मौजूद मराठी भाषी लोगों के बीच रहने के बावजूद उन्होंने मराठी भाषा नहीं सीखी. इसके बजाय जेल के सख्त अनुशासन ने उनके व्यवहार को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई.
 

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