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संगीत के जादूगर एआर रहमान, जिन्होंने छोटे से स्टूडियो से जीती दुनिया

मुंबई, 5 जनवरी (आईएएनएस)। संगीतकार एआर रहमान का नाम आज दुनियाभर में मशहूर है। उनकी धुनें हर किसी के दिल को छू जाती हैं। उनकी संगीत यात्रा कई लोगों के लिए प्रेरणा है। रहमान की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया। उन्होंने अपने घर के आंगन में एक छोटा सा होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाया था, जो बाद में उनके करियर की पहली सीढ़ी साबित हुआ।
संगीत के जादूगर एआर रहमान, जिन्होंने छोटे से स्टूडियो से जीती दुनिया

मुंबई, 5 जनवरी (आईएएनएस)। संगीतकार एआर रहमान का नाम आज दुनियाभर में मशहूर है। उनकी धुनें हर किसी के दिल को छू जाती हैं। उनकी संगीत यात्रा कई लोगों के लिए प्रेरणा है। रहमान की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत से हर मुश्किल को पार किया। उन्होंने अपने घर के आंगन में एक छोटा सा होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो बनाया था, जो बाद में उनके करियर की पहली सीढ़ी साबित हुआ।

ए.आर. रहमान का जन्म 6 जनवरी 1967 को तमिलनाडु में हुआ था। उनका असली नाम ए.एस. दिलीप कुमार था। उनके पिता आर.के. शेखर, मलयालम फिल्मों के प्रसिद्ध संगीतकार थे। रहमान के पिता ने उन्हें सिर्फ चार साल की उम्र में पियानो बजाना सिखाया। उनकी मां भी संगीत में दिलचस्पी रखती थीं। बचपन में ही रहमान को संगीत का हुनर विरासत में मिला, लेकिन उनका जीवन आसान नहीं रहा। जब रहमान नौ साल के थे, उनके पिता का देहांत हो गया। इसके बाद घर की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं।

पिता के जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। उन्हें 15 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। घर चलाने के लिए उनके पिता के संगीत वाद्ययंत्रों को किराए पर देना पड़ा। रहमान को भी ये उपकरण बजाने का मौका मिला। पहली बार उन्होंने इस काम के लिए केवल 50 रुपए कमाए। यह छोटी सी कमाई उनके जीवन की पहली सफलता थी, जिसने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई।

रहमान ने 20 साल की उम्र में धर्म और नाम भी बदल लिया। उन्होंने इस्लाम कबूल किया और अपना नाम अल्लाह रक्खा रहमान रखा। इसके पीछे एक निजी कारण भी था। उनकी छोटी बहन गंभीर रूप से बीमार हो गई थी और रहमान ने मस्जिदों में उसकी स्वास्थ्य के लिए दुआ की। उसके ठीक होने के बाद रहमान ने अपनी आस्था और जीवन के नए अध्याय की शुरुआत की।

उनका करियर शुरुआत में बहुत साधारण था। उन्होंने कई विज्ञापन और जिंगल्स बनाने शुरू किए। इसी दौरान उनके काम पर फिल्मकार मणिरत्नम की नजर पड़ी और उन्होंने रहमान को फिल्म 'रोजा' में म्यूजिक बनाने का मौका दिया। इस फिल्म के गाने हिट हुए और रहमान का नाम संगीत की दुनिया में फैल गया। इस फिल्म से ही उनकी पहली बड़ी सफलता और पहचान आई।

रहमान की खास बात यह है कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत छोटे से होम रिकॉर्डिंग स्टूडियो से की। अपने घर के आंगन में बनाई गई इस छोटी जगह में रहमान ने रिकॉर्डिंग शुरू की। यह जगह उनकी मेहनत और जुनून का प्रतीक बन गई। यही स्टूडियो बाद में उनकी दुनिया जीतने वाली धुनों का केंद्र बना। इसके बाद उन्होंने कई बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों में काम किया। उनकी पहली बॉलीवुड फिल्म 'रंगीला' थी, उसके बाद उन्होंने 'ताल', 'लगान', 'स्वदेश', 'रंग दे बसंती', 'स्लमडॉग मिलेनियर' जैसी हिट फिल्मों में संगीत दिया।

रहमान को उनके काम के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले। उन्हें दो ऑस्कर, दो ग्रैमी, एक गोल्डन ग्लोब, छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और 15 फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से भी नवाजा। उनके गाने न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में पसंद किए जाते हैं।

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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