Samachar Nama
×

Prithviraj Kapoor Birth Anniversary: 70 रुपये की नौकरी से शुरू हुआ था सफर, ऐसे खड़ी की कपूर खानदान की फिल्मी विरासत

Prithviraj Kapoor Birth Anniversary: 70 रुपये की नौकरी से शुरू हुआ था सफर, ऐसे खड़ी की कपूर खानदान की फिल्मी विरासत

हिंदी सिनेमा में कपूर परिवार का नाम कई पीढ़ियों से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। इस फिल्मी विरासत की नींव अभिनेता पृथ्वीराज कपूर ने रखी थी। 3 नवंबर को उनकी 120वीं जयंती मनाई जा रही है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से की थी, लेकिन मेहनत और अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में खास मुकाम हासिल किया। पृथ्वी थिएटर की स्थापना के जरिए उन्होंने रंगमंच को भी नई पहचान दी।

17 साल की उम्र में हुई थी शादी

पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर 1906 को समुंदरी में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। साल 1923 में महज 17 साल की उम्र में उनकी शादी रामसरनी मेहरा कपूर से हुई थी। इस दंपती के छह बच्चे हुए, जिनमें राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर, देवी कपूर, उर्मिला कपूर और नंदी कपूर शामिल थे।

पृथ्वीराज कपूर, ऋषि कपूर और रणधीर कपूर के दादा थे। वहीं, रणबीर कपूर, करिश्मा कपूर और करीना कपूर उनके परपोते-परपोतियां हैं। इस तरह कपूर परिवार की कई पीढ़ियों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई।

मुंबई में 70 रुपये से शुरू की नौकरी

पृथ्वीराज कपूर ने ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद वकालत की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया था। हालांकि, अभिनय के प्रति उनका लगाव उन्हें फिल्मी दुनिया की ओर ले गया। काम की तलाश में जब वे मुंबई पहुंचे, तो उन्हें इंपीरियल फिल्म स्टूडियो में नौकरी मिल गई।

यहां उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम शुरू किया और उन्हें हर महीने 70 रुपये मिलते थे। छोटी शुरुआत के बावजूद उन्होंने अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना नहीं छोड़ा।

भारत की पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' में बने विलेन

पृथ्वीराज कपूर को शुरुआत से ही अभिनय और थिएटर में दिलचस्पी थी। कॉलेज के दिनों में प्रोफेसर जय दलाल ने उन्हें रंगमंच से जुड़ने की सलाह दी थी। साल 1930 में उन्होंने फिल्म 'सिनेमा गर्ल' में काम किया, जिसका निर्देशन भगवती प्रसाद मिश्रा ने किया था।

इसके बाद 1931 में वे 'आलम आरा' में नजर आए। यह भारत की पहली बोलती फिल्म थी। इसमें पृथ्वीराज कपूर ने खलनायक की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा और पृथ्वीराज को भी पहचान दिलाई।

1944 में शुरू किया पृथ्वी थिएटर

फिल्मों में सफलता मिलने के बाद पृथ्वीराज कपूर ने रंगमंच के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया। साल 1944 में उन्होंने पृथ्वी थिएटर की स्थापना की। इस थिएटर के जरिए उन्होंने देशभर में नाटकों का मंचन किया। करीब 16 साल तक चले इस सफर में 2,500 से ज्यादा प्रस्तुतियां हुईं।

बाद में उनके बेटे और अभिनेता शशि कपूर ने 1978 में पृथ्वी थिएटर को दोबारा शुरू किया। इसके बाद यह मुंबई में रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया।

65 साल की उम्र में हुआ निधन

पृथ्वीराज कपूर ने भारतीय सिनेमा और थिएटर दोनों को अपनी कला और योगदान से समृद्ध किया। उन्होंने कपूर परिवार के लिए वह आधार तैयार किया, जिस पर आगे की पीढ़ियों ने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाई। 29 मई 1972 को 65 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।

Share this story

Tags