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पितृ विसर्जन पर इमोशनल हुईं कंगना रनौत, परदादा को याद कर कहा-शुक्रिया दादाजी

मुंबई, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री कंगना रनौत ने सर्वपितृ अमावस्या (जिसे महालया अमावस्या या पितृ विसर्जन भी कहा जाता है) पर अपने परदादा सूरज सिंह रनौत को याद कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आज वो जो कुछ भी हैं, उसका श्रेय उनके परदादा को ही जाता है, उन्हीं की वजह से उनमें आज इतना आत्मविश्वास है।

मुंबई, 10 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री कंगना रनौत ने सर्वपितृ अमावस्या (जिसे महालया अमावस्या या पितृ विसर्जन भी कहा जाता है) पर अपने परदादा सूरज सिंह रनौत को याद कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि आज वो जो कुछ भी हैं, उसका श्रेय उनके परदादा को ही जाता है, उन्हीं की वजह से उनमें आज इतना आत्मविश्वास है।

अभिनेत्री ने इंस्टाग्राम स्टोरीज सेक्शन पर अपने परदादा सूरज सिंह रनौत की तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उन्होंने अपने दादा जी को स्वतंत्रता सेनानी और मशहूर नेता बताया। अभिनेत्री ने अपनी इस पोस्ट के जरिए सरजू सिंह रनौत को स्वतंत्रता सेनानी और मशहूर नेता बताते हुए कहा कि उनके जीवन पर उनके परदादा का बहुत बड़ा असर रहा है, जिसके लिए वो हमेशा उनकी आभारी रहेंगी।

तस्वीर शेयर करते हुए कंगना ने लिखा, "पितृ पक्ष चल रहा है तो ये मेरे परदादा की आखिरी तस्वीर है, जब 102 साल की उम्र में उनका निधन हुआ था। जब मैं छोटी थी, दादाजी ने मुझे गोद ले लिया था। आज मैं जो कुछ भी हूं, उसका पूरा श्रेय दादाजी को जाता है। वो सुबह मुझे जगाने के लिए गाना गाते थे, जब लैंडलाइन फोन बजता था तो मुझे अपनी सेक्रेटरी बनाकर खेलने देते थे, वो हंसते हुए बुद्ध की तरह हंसते थे और मैं उनके हिलते हुए पेट पर खेलती थी और मेरे माता-पिता मुझ पर सख्त होते थे तो वो उन्हें डांटते भी थे।"

कंगना रनौत ने आगे लिखा, "मेरे परदादा ने हमेशा मुझे मेन कैरेक्टर वाली एनर्जी दी, जो आज मुझमें है। उन्होंने मुझे हमेशा देखा, सुना और प्यार महसूस कराया। जब उनका निधन हुआ, तब मैं 'तनु वेड्स मनु' की शूटिंग कर रही थी, उन्हें मुझ पर बहुत गर्व था। थैंक यू दादाजी।"

कंगना रनौत के परदादा सरजू सिंह रनौत हिमाचल प्रदेश की मंडी की त्रिफालघाट विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के विधायक रह चुके थे। उन्होंने अंग्रेजों के शासन के दौरान ब्रिटिश सरकार के तहत हेड क्लर्क की नौकरी छोड़ दी थी और महात्मा गांधी के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए थे। वे अपने गांव के इकलौते व्यक्ति थे जो उस समय अंग्रेजी जानते थे और अपने प्रयासों से गांव में बिजली लेकर आए थे।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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