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जंतर-मंतर प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह के पहुंचने का दावा भ्रामक, वायरल वीडियो की सच्चाई आई सामने

जंतर-मंतर प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह के पहुंचने का दावा भ्रामक, वायरल वीडियो की सच्चाई आई सामने

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच अभिनेता नसीरुद्दीन शाह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो के साथ दावा किया गया कि वह अपने बेटे विवान शाह के साथ प्रदर्शन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे थे और पुलिस कार्रवाई के बाद लौट रहे छात्रों को चुपचाप देखते रहे। हालांकि, वायरल दावे की पड़ताल में यह दावा भ्रामक निकला। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वायरल वीडियो का दिल्लीमें चल रहे छात्र प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।

क्या किया गया था दावा?

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो के साथ दावा किया गया कि नसीरुद्दीन शाह बिना कोई सार्वजनिक बयान दिए जंतर-मंतर पहुंचे थे। पोस्ट में कहा गया कि वह एक खंभे के सहारे खड़े होकर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद लौट रहे छात्रों को देखते रहे।इन दावों के कारण वीडियो तेजी से वायरल हो गया और कई लोगों ने इसे दिल्ली के छात्र आंदोलन से जोड़कर साझा किया।

वीडियो की सच्चाई क्या है?

हालांकि, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो दिल्ली का नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया कि यह वीडियो मुंबई के कोलाबा स्थित रीगल सिनेमा के बाहर का है और इसका जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।इस तरह सोशल मीडिया पर किया गया दावा तथ्यात्मक रूप से सही नहीं पाया गया।

फैक्ट चेक के बाद साफ हुई स्थिति

वीडियो की वास्तविक लोकेशन सामने आने के बाद स्पष्ट हो गया कि अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने का दावा प्रमाणित नहीं है। वीडियो को गलत संदर्भ के साथ साझा किए जाने के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई।विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वायरल वीडियो या फोटो पर विश्वास करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है, क्योंकि कई बार पुराने या अलग स्थान के वीडियो को नए घटनाक्रम से जोड़कर साझा किया जाता है।

सोशल मीडिया पर बढ़ रहे भ्रामक दावे

हाल के दिनों में बड़े आंदोलनों और चर्चित घटनाओं के दौरान सोशल मीडिया पर कई पुराने वीडियो और तस्वीरें नए दावों के साथ वायरल होती रही हैं। ऐसे मामलों में फैक्ट-चेक के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाती है।इस मामले में भी वायरल वीडियो को दिल्ली के छात्र प्रदर्शन से जोड़ने का दावा सही नहीं पाया गया। इसलिए लोगों से अपील की जा रही है कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि विश्वसनीय स्रोतों से अवश्य करें।

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