Nana Patekar की आखिरी फिल्म ‘शक्तिशालिनी’ में दिखेगा बागी अंदाज, हॉरर-कॉमेडी नहीं बल्कि सोशल हॉरर-ड्रामा होगी कहानी
दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर अपनी आखिरी फिल्म ‘शक्तिशालिनी’ में एक बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आएंगे। दिनेश विजन की मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म में नाना का किरदार उनकी कॉमिक भूमिकाओं से काफी अलग बताया जा रहा है। फिल्म की कहानी, कलाकारों और चंबल के बीहड़ों में बसे इसके माहौल को इसकी सबसे बड़ी खासियत माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, ‘शक्तिशालिनी’ को पारंपरिक हॉरर-कॉमेडी की तरह पेश नहीं किया गया है। इसमें सामाजिक परिस्थितियों, वास्तविक घटनाओं से प्रेरित घटनाक्रम और चंबल की दुनिया को अहम जगह दी गई है। फिल्म का निर्देशन ‘मुंज्या’ और ‘थामा’ से जुड़े आदित्य सरपोतदार ने किया है, जबकि इसकी कहानी ‘गुल्लक’ फेम दुर्गेश सिंह ने लिखी है।
हॉरर-कॉमेडी से अलग होगी फिल्म की कहानी
फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ‘शक्तिशालिनी’ को केवल हॉरर-कॉमेडी कहना इसकी कहानी को सीमित कर देगा। इसमें डर और तनाव पैदा करने के लिए कॉमेडी के बजाय सामाजिक परिस्थितियों और किरदारों की जिंदगी पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।
फिल्म में हॉरर के तत्व जरूर हैं, लेकिन इसका मुख्य आधार गंभीर ड्रामा बताया जा रहा है। कहानी में ऐसे हालात दिखाए जाएंगे, जहां आसपास का माहौल, सामाजिक दबाव और लोगों के संघर्ष बेचैनी पैदा करते हैं। इसी वजह से इसे सोशल हॉरर-ड्रामा के तौर पर देखा जा रहा है।
वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है कहानी
‘शक्तिशालिनी’ की कहानी वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फिल्म में वास्तविक घटनाओं को कितनी बारीकी से दिखाया गया है और किन हिस्सों में रचनात्मक बदलाव किए गए हैं।
फिल्म की पृष्ठभूमि और कहानी का ट्रीटमेंट इसे मैडॉक फिल्म्स की दूसरी चर्चित हॉरर-कॉमेडी फिल्मों से अलग बनाता है। यहां डर पैदा करने के लिए केवल अलौकिक घटनाओं पर निर्भर रहने के बजाय सामाजिक परिस्थितियों और किरदारों की दुनिया को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।
चंबल के बीहड़ों में हुई शूटिंग, 40 डिग्री गर्मी में काम
फिल्म की शूटिंग चंबल क्षेत्र, ग्वालियर और आसपास के इलाकों में की गई। भिंड और मुरैना जैसी जगहों पर भी शूटिंग होने की जानकारी सामने आई है। इन इलाकों के बीहड़, ऊबड़-खाबड़ जमीन और प्राकृतिक वातावरण फिल्म को एक अलग दृश्यात्मक पहचान दे सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, शूटिंग के दौरान तापमान करीब 40 डिग्री तक पहुंच गया था। इसके बावजूद कलाकारों और क्रू ने लंबे शेड्यूल में काम किया। नाना पाटेकर के लिए बीहड़ों में शूटिंग करना एक अलग अनुभव था। बताया जाता है कि इससे पहले उन्होंने इस तरह के माहौल में काम नहीं किया था।
नाना पाटेकर का किरदार होगा गंभीर और बागी
फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार गंभीर, प्रभावशाली और बागी तेवरों वाला बताया जा रहा है। यह भूमिका उनके लोकप्रिय कॉमिक अंदाज से अलग होगी। किरदार की दुनिया संघर्ष, सामाजिक दबाव और अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने की जिद से जुड़ी हुई है।
हालांकि, उनके किरदार की पूरी पृष्ठभूमि और कहानी में उसकी भूमिका को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। इसके बावजूद फिल्म से जुड़े लोगों का मानना है कि नाना का अनुभव और अभिनय इस किरदार को खास बना सकता है।
अनीत पड्डा को नाना पाटेकर से सीखने का मौका
‘शक्तिशालिनी’ में अनीत पड्डा भी नजर आएंगी। सूत्रों के मुताबिक, नाना पाटेकर ने शूटिंग के दौरान युवा कलाकारों के साथ अपने अभिनय से जुड़े अनुभव साझा किए।
नाना जैसे अनुभवी अभिनेता के साथ काम करना अनीत के लिए सीखने का अवसर रहा। किरदार को समझने, संवादों की बारीकियों और दृश्यों में भावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने जैसे पहलुओं पर उनके अनुभव युवा कलाकारों के काम आ सकते हैं।
कहानी सुनाने के लिए फार्महाउस पहुंचे थे निर्देशक आदित्य सरपोतदार
नाना पाटेकर और निर्देशक आदित्य सरपोतदार के बीच पहले भी फिल्मों को लेकर बातचीत हो चुकी थी। सूत्रों के मुताबिक, आदित्य उन्हें अपनी दो मराठी फिल्मों के लिए भी अप्रोच कर चुके थे, लेकिन तारीखों और अन्य कारणों से वे प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाए।
आखिरकार ‘शक्तिशालिनी’ में दोनों को साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म की कहानी सुनाने के लिए आदित्य सरपोतदार और लेखक दुर्गेश सिंह कई बार नाना के फार्महाउस पहुंचे थे। कहानी का नैरेशन एक ही बैठक में पूरा नहीं हुआ, बल्कि कई मुलाकातों के दौरान इस पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया जाता है कि इन बैठकों में कुल मिलाकर करीब आठ से दस घंटे कहानी सुनाने और समझने में लगे।
कहानी सुनते-सुनते खाना भी बनाते थे नाना
सूत्रों के अनुसार, नाना पाटेकर के फार्महाउस पर कहानी सुनाने का माहौल औपचारिक बैठकों जैसा नहीं था। बातचीत और कहानी पर चर्चा के दौरान नाना अपनी सामान्य दिनचर्या भी जारी रखते थे। यहां तक कि कहानी सुनते समय उनके खुद खाना बनाने का भी जिक्र सामने आया है।
किसी गंभीर किरदार को पर्दे पर उतारने से पहले उसकी पृष्ठभूमि, स्वभाव और कहानी में उसके महत्व को समझना जरूरी होता है। फिल्म के नैरेशन के दौरान इन पहलुओं पर विस्तार से बातचीत की गई।
इरफान खान की एक्टिंग के प्रशंसक थे नाना पाटेकर
चंबल के बीहड़ों और बागी जीवन की चर्चा के दौरान दिवंगत अभिनेता इरफान खान का जिक्र भी हुआ। सूत्रों के मुताबिक, नाना पाटेकर इरफान की अभिनय क्षमता की काफी तारीफ करते थे और उन्हें बेहतरीन कलाकारों में गिनते थे।
इस संदर्भ में इरफान खान की फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ का भी उल्लेख किया गया, जो चंबल क्षेत्र और एक खिलाड़ी के बागी बनने की कहानी को पर्दे पर पेश करती है। बताया जाता है कि नाना को यह फिल्म काफी पसंद थी।
हालांकि, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि ‘शक्तिशालिनी’ उसी कहानी या शैली का अनुसरण करती है। दोनों फिल्मों की दुनिया और कथानक अलग बताए जा रहे हैं।
एडिटिंग शुरू, फरवरी में रिलीज की चर्चा
फिल्म की एडिटिंग शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इसके म्यूजिक से सचिन-जिगर का नाम भी जुड़ा बताया जा रहा है। किसी पुराने गाने को नए अंदाज में पेश करने पर चर्चा होने की खबर है, लेकिन इसे फिल्म की अंतिम संगीत योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म फरवरी में रिलीज हो सकती है। हालांकि, रिलीज की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। फिल्म में ‘थामा’ या ‘भेड़िया’ जैसी भारी वीएफएक्स आधारित प्रस्तुति के बजाय कहानी, माहौल और किरदारों पर अधिक जोर दिए जाने की बात कही जा रही है।
नाना पाटेकर की भूमिका क्यों है खास?
‘शक्तिशालिनी’ में नाना पाटेकर का गंभीर और बागी किरदार, चंबल की वास्तविक लोकेशंस तथा सामाजिक परिस्थितियों से प्रेरित कहानी इसे अलग पहचान दे सकती है। युवा कलाकारों के साथ उनका काम भी फिल्म का महत्वपूर्ण पहलू बताया जा रहा है।मैडॉक फिल्म्स के लिए यह प्रोजेक्ट अपनी चर्चित हॉरर-कॉमेडी शैली से आगे बढ़कर एक अलग तरह की कहानी पेश करने का अवसर हो सकता है। अब दर्शकों को फिल्म के आधिकारिक टीजर, रिलीज की तारीख और नाना पाटेकर के किरदार से जुड़ी अधिक जानकारी का इंतजार रहेगा।

