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नकुल मेहता ने लद्दाख में बिताया सुकून का पल, कहा- जिंदगी के असल मायने समझ में आए

मुंबई, 27 मई (आईएएनएस)। टेलीविजन अभिनेता नकुल मेहता हाल ही में लद्दाख की खूबसूरत वादियों में वक्त बिताकर लौटे हैं। बुधवार को अभिनेता सोशल मीडिया पर अपने इस खूबसूरत सफर की यादगार झलकियां शेयर कीं।
नकुल मेहता ने लद्दाख में बिताया सुकून का पल, कहा- जिंदगी के असल मायने समझ में आए

मुंबई, 27 मई (आईएएनएस)। टेलीविजन अभिनेता नकुल मेहता हाल ही में लद्दाख की खूबसूरत वादियों में वक्त बिताकर लौटे हैं। बुधवार को अभिनेता सोशल मीडिया पर अपने इस खूबसूरत सफर की यादगार झलकियां शेयर कीं।

इंस्टाग्राम पोस्ट की गई तस्वीरों में अभिनेता के साथ उनके लद्दाख के दोस्त ग्यात्सो, उनकी प्यारी बेटी रूदा और वहां के नजारों की तस्वीरें शामिल हैं। इस पोस्ट के जरिए अभिनेता ने अपनी लद्दाख यात्रा के सफर को शेयर किया।

अभिनेता ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में सुकून पाने के लिए अचानक से लद्दाख जाने का फैसला किया। उन्होंने लिखा, "मैं अब हर साल लद्दाख की यात्रा पर जाता हूं और इस जगह ने मुझे कभी निराश नहीं किया। वहां की वादियों में जाकर इंसान को इस दुनिया की खूबसूरती, जिंदगी के असली मायने और कुदरत के सामने अपनी छोटी-सी जिंदगी का एहसास होता है। मुझे लद्दाख जाकर जिंदगी जीने की लय मिल जाती है।"

नकुल ने बताया कि सफर की शुरुआत में वे 'स्लो गार्डन' नामक एक बेहद खूबसूरत और शांत जगह पर रुके थे। उन्होंने लिखा, "'स्लो गार्डन' में मैंने दोस्त ग्यात्सो, उनकी प्यारी बेटी रूदा और उनके पालतू जानवरों के साथ वक्त बिताया। वहां समय बहुत सुकून से गुजरता है। ग्यात्सो अपनी बेटी की पसंद के हिसाब से खाना बनाता, उसे स्कूल छोड़ने जाता और फिगर स्केटिंग प्रोग्राम में भी ले जाता है। उसे देखकर यकीन करना मुश्किल होता है कि यह शख्स लेह का सबसे व्यस्त बार भी संभालता है।"

नकुल ने बताया कि ग्यात्सो के कहने पर वह अपनी पसंदीदा किताब ‘ग्रीनलाइट्स’ को छोड़कर उसके साथ पिकनिक पर निकल गए। उन्होंने लिखा, "रविवार को ग्यात्सो ने मुझसे पूछा कि क्या मैं रूदा और कुत्तों के साथ पिकनिक पर चलना चाहूंगा। मैंने अपनी किताब ‘ग्रीनलाइट्स’ को छोड़ने का कठिन फैसला लिया और हम सब उनकी कैंपर वैन में निकल पड़े। हम ऐसी जगह ढूंढ रहे थे जहां बैठकर रेमन बना सकें और बीयर पी सकें। वह दिन मुझे मेरी पसंदीदा जापानी फिल्म ‘द परफेक्ट डेज’ की याद दिला गया। हम सब साथ थे, अपनी-अपनी चीजों में मग्न, बीच-बीच में जिंदगी और उसके मतलब पर बातें कर रहे थे। रेत में खेलते हुए, हंसते हुए, जैसे जिंदगी को समझने की कोशिश कर रहे हों।"

उन्होंने लिखा, "ग्यात्सो और उनकी बेटी रूदा को साथ देखकर मेरे मन में उम्मीद और अपनापन भर गया। वापसी से पहले ग्यात्सो ने एक बहुत खूबसूरत बात कही। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा धर्म दयालुता है। तब से मैं उसी बात के बारे में सोच रहा हूं। शायद जिंदगी में इतना ही काफी है। शायद यही सब कुछ है।"

--आईएएनएस

एनएस/पीएम

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