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मुकेश खन्ना ने फिर उठाई ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की मांग, वीडियो में बोले- ‘जन गण मन’ को नहीं मिलना चाहिए यह दर्जा

मुकेश खन्ना ने फिर उठाई ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की मांग, वीडियो में बोले- ‘जन गण मन’ को नहीं मिलना चाहिए यह दर्जा

टीवी के मशहूर ‘शक्तिमान’ अभिनेता मुकेश खन्ना एक बार फिर राष्ट्रगान को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को देश का राष्ट्रगान बनाने की मांग दोहराई है। मीडिया से बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना ने दावा किया कि ‘जन गण मन’ ब्रिटिश शासन के दौर में जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में लिखा गया था। हालांकि, उनके इस दावे को लेकर पहले भी सोशल मीडिया पर काफी विवाद हो चुका है।

मुकेश खन्ना ने कहा कि ‘जन गण मन’ में इस्तेमाल किया गया ‘अधिनायक’ शब्द ब्रिटिश शासक के संदर्भ में है और इसमें उन्हें भारत के भाग्य का विधाता बताया गया है। उनका मानना है कि ऐसे गीत को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रगान नहीं माना जाना चाहिए।

‘वंदे मातरम’ को बताया मातृभूमि की भक्ति का प्रतीक

मुकेश खन्ना ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर कहा कि इसमें मातृभूमि के प्रति भक्ति और सम्मान की भावना दिखाई देती है। उनके मुताबिक, देश में ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत को आजादी मिले कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन देश में आज भी अंग्रेजी शिक्षा और ब्रिटिश दौर की व्यवस्थाओं को जरूरत से ज्यादा महत्व दिया जाता है। उनका कहना है कि स्वतंत्र भारत को अपनी संस्कृति और राष्ट्रीय भावनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान

यह पहली बार नहीं है जब मुकेश खन्ना ने ‘जन गण मन’ को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी वह राष्ट्रगान के संबंध में ऐसा बयान दे चुके हैं, जिस पर सोशल मीडिया पर विवाद हुआ था। उस समय उन्होंने दावा किया था कि ‘जन गण मन’ रवींद्रनाथ टैगोर ने रानी एलिजाबेथ की प्रशंसा में लिखा था।

उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें जमकर ट्रोल किया था। कई लोगों ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए उनके दावे पर सवाल उठाए थे। यूजर्स ने यह भी याद दिलाया था कि ‘जन गण मन’ पहली बार वर्ष 1911 में सार्वजनिक रूप से गाया गया था।

इतिहास को लेकर उठते रहे हैं सवाल

‘जन गण मन’ को लेकर लंबे समय से यह बहस होती रही है कि इसके मूल संदर्भ क्या थे और इसे किसके लिए लिखा गया था। हालांकि, मुकेश खन्ना की ओर से इसे ब्रिटिश शासक की प्रशंसा से जोड़ने वाला दावा विवाद का विषय रहा है।

वहीं ‘वंदे मातरम’ का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ से लिया गया है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति के प्रतीक के रूप में व्यापक रूप से इस्तेमाल हुआ।

मुकेश खन्ना के ताजा बयान के बाद एक बार फिर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, देश के राष्ट्रगान को बदलने की मांग पर अंतिम निर्णय संवैधानिक और सरकारी स्तर पर ही लिया जा सकता है।

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