'खून भरी मांग' से मिली पहचान पर कम हाइट ने एक्ट्रेस सोनू वालिया को किया फिल्म इंडस्ट्री से आउट
मुंबई, 18 फरवरी (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में 80 से 90 के दशक में कई बड़ी अभिनेत्रियों ने पर्दे पर राज किया, लेकिन कुछ अभिनेत्रियां ऐसी थीं जिन्हें सफलता तो मिली लेकिन उसकी समय-सीमा बहुत कम थी। हम बात कर रहे हैं फेमिना मिस इंडिया यूनिवर्स रह चुकी सोनू वालिया की, जिन्होंने पर्दे पर बड़े स्टार्स के साथ काम किया, लेकिन उनकी लंबाई ही उनके करियर का फुलस्टॉप बन गई। 19 फरवरी को अभिनेत्री अपना 62वां जन्मदिन मना रही हैं।
सोनू ने अपने करियर में कई हिट फिल्में दीं, लेकिन उन्हें पहचान 'खून भरी मांग' से मिली। फिल्म में रेखा, कबीर बेदी और कादर खान जैसे बड़े स्टार्स थे। सोनू ने नंदिनी की भूमिका में फैंस का दिल जीत लिया था। सोनू वालिया की कहानी इस फिल्म से भी पहले शुरू हो गई थी। 19 फरवरी, 1964 में जन्मीं सोनू ने 1985 में मिस इंडिया का खिताब जीता, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। पंजाबी परिवार में जन्मीं संजीत कौर वालिया उर्फ सोनू के पिता सतिंदर सिंह वालिया भारतीय सेना में कार्यरत थे, जबकि उनकी मां दमनजीत कौर हाउस वाइफ थीं।
सोनू के करियर की शुरुआत औसत और फिर हिट फिल्मों के साथ हुई, लेकिन फिर ऐसा समय आया, जब अमिताभ बच्चन के साथ 'तूफान' में काम करके भी उनका करियर नहीं बचा और बाकी की कसर उनकी हाइट ने पूरी कर दी। सोनू ने खुद इस बात का खुलासा किया था कि जब इंडस्ट्री में खान की एंट्री हुई थी, तो उनके लिए काम मिल पाना मुश्किल था। अभिनेत्री पहले अमिताभ, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, सनी देओल, विनोद खन्ना, और कबीर बेदी जैसे लंबे स्टार्स के साथ काम कर चुकी थीं और लंबाई कभी उनके लिए परेशानी नहीं बनी, लेकिन खान्स के आने के बाद फिल्में मिलना कम हो गया। हालांकि अभिनेत्री ने शाहरुख खान के साथ फिल्म 'दिल आशना है' में काम किया था।
बहुत कम लोग जानते हैं कि सोनू वालिया ने 'खून भरी मांग' से हिंदी सिनेमा में कदम नहीं रखा, बल्कि उससे पहले उनकी एक फिल्म रिलीज हो चुकी थी और दूसरी की शूटिंग पूरी हो चुकी है। 'फिल्म खून भरी मांग' भी अभिनेत्री को बहुत मुश्किल से मिली थी और उन्होंने राकेश रोशन को बहुत मुश्किल से कंवेंस किया था। फिल्म के डायरेक्टर राकेश रोशन नया चेहरा ढूंढ रहे थे और फिल्म के लिए सोनू ने डायरेक्टर को पहली फिल्म के क्लिप्स और डांस वीडियो दिखाए थे। खुद अभिनेत्री ने बताया था कि डायरेक्टर को मनाना बहुत मुश्किल था क्योंकि वे जल्दी ही नए चेहरों पर भरोसा नहीं करते थे। हालांकि मेहनत के बाद सोनू को फिल्म मिली और अपने ग्रे-नेचर किरदार के साथ उन्होंने फैंस का दिल जीत लिया।
सोनू को 'खून भरी मांग' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। इस सक्सेस के बाद अभिनेत्री को साल 1988 में आई 'आकर्षण', 'तूफान', 'महा-संग्राम' और 'नंबरी आदमी' जैसी फिल्मों में देखा गया है, लेकिन पर्दे पर या तो औसत रही या फिर फ्लॉप। आज अभिनेत्री गुमनाम जिंदगी जी रही हैं।
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