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महिलाओं के खाना बनाने वाले बयान पर कंगना रनोट का समर्थन, वीडियो में देंखे बचपन का किस्सा साझा कर बोलीं- 'देखभाल करना महिलाओं का स्वभाव'

महिलाओं के खाना बनाने वाले बयान पर कंगना रनोट का समर्थन, वीडियो में देंखे बचपन का किस्सा साझा कर बोलीं- 'देखभाल करना महिलाओं का स्वभाव'

अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनोट ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने महिलाओं को खाना बनाना सीखने की सलाह दी थी। कंगना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बचपन की यादें साझा करते हुए कहा कि देखभाल करना और अपने प्रियजनों को खाना खिलाना महिलाओं के स्वभाव का हिस्सा है।हालांकि, कंगना के इस समर्थन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणी को लेकर बहस छिड़ गई है। जहां कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, वहीं कई यूजर्स ने उनकी आलोचना भी की।

क्या कहा था आनंदीबेन पटेल ने?

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि महिलाएं चाहे शिक्षक बनें, आईएएस अधिकारी बनें या किसी भी बड़े पद पर पहुंचें, उन्हें अपने परिवार के लिए खाना बनाना आना चाहिए।उनके इस बयान पर सोशल मीडिया और विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

कंगना ने साझा की बचपन की याद

आनंदीबेन पटेल के बयान का समर्थन करते हुए कंगना रनोट ने X पर लिखा कि बचपन में उनके भाई को फुटबॉल और क्रिकेट खेलने का शौक था, जबकि उन्हें गुड़ियों के घर बनाना, उनके कपड़े सिलना और उनके लिए खाना बनाना पसंद था।

उन्होंने लिखा,

"जब हम छोटे थे, तो मेरा भाई फुटबॉल और क्रिकेट खेलता था। लेकिन मैं बहुत ध्यान से गुड़ियों के घर बनाती थी, उनके कपड़े सिलती थी और उनके लिए खाना बनाती थी। इसे देखकर घर के सभी लोग खुश होते थे।"

कंगना ने आगे कहा कि खाना खिलाना और दूसरों की देखभाल करना महिलाओं का स्वाभाविक गुण है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

कंगना रनोट की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों ने इसे भारतीय पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं से जोड़ते हुए समर्थन दिया, जबकि अन्य ने कहा कि खाना बनाना केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है और यह एक जीवन कौशल है, जिसे पुरुष और महिलाएं दोनों सीख सकते हैं।

अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

कंगना के बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थकों का कहना है कि उन्होंने परिवार और देखभाल की भावना को महत्व दिया है, जबकि आलोचकों का मानना है कि ऐसे बयान पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं को बढ़ावा देते हैं।फिलहाल, यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और इस पर विभिन्न वर्गों के लोग अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

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