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जब संजय मिश्रा एक्टिंग छोड़कर ढाबे पर करने लगे थे काम, फिर ऐसे हुई फिल्मों में वापसी

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें पर्दे पर देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। संजय मिश्रा भी ऐसे ही कलाकार हैं। 'गोलमाल', 'धमाल', 'वध', 'भूल भुलैया' और 'आंखों देखी' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। रोल छोटा हो या बड़ा, संजय मिश्रा जब भी स्क्रीन पर आते हैं, अपनी एक्टिंग से किरदार में जान डाल देते हैं। उनकी जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था, जब उन्होंने एक्टिंग से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला कर लिया था और ऋषिकेश के एक ढाबे पर काम करने लगे थे।

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें पर्दे पर देखते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। संजय मिश्रा भी ऐसे ही कलाकार हैं। 'गोलमाल', 'धमाल', 'वध', 'भूल भुलैया' और 'आंखों देखी' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। रोल छोटा हो या बड़ा, संजय मिश्रा जब भी स्क्रीन पर आते हैं, अपनी एक्टिंग से किरदार में जान डाल देते हैं। उनकी जिंदगी का एक दौर ऐसा भी था, जब उन्होंने एक्टिंग से पूरी तरह दूरी बनाने का फैसला कर लिया था और ऋषिकेश के एक ढाबे पर काम करने लगे थे।

6 अक्टूबर 1963 को जन्मे संजय मिश्रा का बचपन वाराणसी में बीता। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से पढ़ाई की और 1989 में वहां से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद थिएटर और टेलीविजन के जरिए उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनानी शुरू की।

फिल्मों में उनका सफर 'ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!' से शुरू हुआ। इसके बाद वह 'सत्या', 'दिल से..', 'वजूद', 'राजकुमार' और 'फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' जैसी फिल्मों में नजर आए। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक ऐसे कलाकार के तौर पर बनने लगी, जो हर तरह के किरदार को अपने अंदाज में निभा सकता है।

निजी जिंदगी में आए एक बड़े झटके ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। पिता के निधन के बाद संजय मिश्रा ने फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला कर लिया। वह मुंबई की चमक-दमक से दूर ऋषिकेश चले गए। यहां उन्होंने एक ढाबे पर काम करना शुरू कर दिया और लोगों के लिए ऑमलेट बनाने लगे। यह दौर उनके लिए आसान नहीं था लेकिन उन्होंने अपनी पहचान को पीछे छोड़कर एक आम जिंदगी जीने की कोशिश की।

दिलचस्प बात यह है कि ढाबे पर आने वाले कुछ लोग उन्हें पहचान भी लेते थे। लोग उनसे पूछते कि क्या वह वही संजय मिश्रा हैं, जिन्होंने 'गोलमाल' में काम किया है। हालांकि संजय मिश्रा अपनी पहचान स्वीकार करने के बजाय मजाक में कह देते थे कि वह उस अभिनेता के हमशक्ल हैं।

हालांकि किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी ने उन्हें दोबारा फिल्मों में आने के लिए मनाया। इसके बाद उन्हें फिल्म 'ऑल द बेस्ट' में काम करने का मौका मिला। यहीं से उनके फिल्मी करियर ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली।

इसके बाद संजय मिश्रा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'गोलमाल: फन अनलिमिटेड' और 'धमाल' जैसी फिल्मों में उनकी कॉमेडी ने दर्शकों को खूब हंसाया, तो 'आंखों देखी' जैसी फिल्म में उन्होंने अपनी गंभीर अदाकारी का दम दिखाया। इस फिल्म में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें समीक्षकों की ओर से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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