हम्फ्री बोगार्ट हॉलीवुड का बड़ा नाम, 'क्लासिक नायकों' में नाम शुमार
नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। विश्व सिनेमा के इतिहास में 14 जनवरी का दिन दुख का सबब बन कर आया, क्योंकि इसी दिन 1957 में हॉलीवुड के महान अभिनेता हम्फ्री बोगार्ट का निधन हुआ था। बोगार्ट सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि उन्होंने फिल्मी नायक की उस छवि को गढ़ा जो न तो पूरी तरह आदर्श थी और न ही पूरी तरह खलनायक, बल्कि मानवीय कमजोरियों और मजबूती से भरी हुई थी। यही वजह है कि उनका प्रभाव दशकों बाद भी सिनेमा में साफ नजर आता है।
हम्फ्री बोगार्ट का जन्म 25 दिसंबर 1899 को न्यूयॉर्क में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर और छोटे-मोटे किरदारों से की, लेकिन शुरुआती वर्षों में उन्हें खास सफलता नहीं मिली। 1930 के दशक में उन्होंने गैंगस्टर और नकारात्मक भूमिकाएं निभाईं, जिनसे उनकी एक सख्त और गंभीर छवि बनी। असली पहचान उन्हें 1941 की फिल्म 'द माल्टीज फाल्कन' से मिली, जिसे फिल्म नॉयर शैली की नींव माना जाता है। इस फिल्म में उनका संयमित, ठंडा लेकिन अंदर से नैतिक किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुआ।
1942 में आई फिल्म 'कासाब्लांसा' ने हम्फ्री बोगार्ट को अमर बना दिया। इस फिल्म में रिक ब्लेन के किरदार में उनका संवाद, भावनाएं और त्याग की भावना आज भी विश्व सिनेमा के सबसे यादगार पलों में गिनी जाती है। “हेयर लुकिंग एट यू किड” जैसे संवाद पॉप कल्चर का हिस्सा बन गए। यह फिल्म न केवल एक प्रेम कहानी थी, बल्कि युद्धकालीन राजनीति, नैतिकता और व्यक्तिगत बलिदान का प्रतीक भी बनी, जिसमें बोगार्ट का अभिनय केंद्रीय भूमिका में था।
अपने करियर में बोगार्ट ने 'द बिग स्लिप', 'टू हैव एंड नॉट टू हैव', 'की लार्गो' और 'द अफ्रीकन क्वीन' जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। 'द अफ्रीकन क्वीन' के लिए उन्हें 1952 में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का ऑस्कर भी मिला। उनकी अभिनय शैली दिखावटी नहीं थी, बल्कि संवादों की सादगी और आंखों की गहराई से भावनाएं व्यक्त करने पर आधारित थी, जो उस दौर के दूसरे अभिनेताओं से उन्हें अलग बनाती थी।
व्यक्तिगत जीवन में भी हम्फ्री बोगार्ट उतने ही चर्चित रहे। अभिनेत्री लॉरेन बैकाल के साथ उनकी शादी हॉलीवुड की सबसे प्रसिद्ध प्रेम कहानियों में से एक मानी जाती है। उम्र के बड़े अंतर के बावजूद दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उन्होंने साथ में कई सफल फिल्में भी कीं।
14 जनवरी 1957 को कैंसर के कारण हम्फ्री बोगार्ट का निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। आज भी जब क्लासिक हॉलीवुड सिनेमा की बात होती है, तो हम्फ्री बोगार्ट का नाम सम्मान और प्रभाव के साथ लिया जाता है।
--आईएएनएस
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