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‘द एक्सॉर्सिज्म ऑफ एमिली रोज’: 67 बार झाड़-फूंक, 6 “शैतान” और 10 महीने तक चला इलाज, वो हॉरर फिल्म जो असली घटना से प्रेरित 

‘द एक्सॉर्सिज्म ऑफ एमिली रोज’: 67 बार झाड़-फूंक, 6 “शैतानों” का दावा और 10 महीने तक चला इलाज, वो हॉरर फिल्म जो असली घटना से प्रेरित 

हॉलीवुड की हॉरर फिल्मों को अक्सर दर्शक केवल कल्पना और मनोरंजन का हिस्सा मानते हैं, लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जिनकी कहानी के पीछे असल घटनाओं की झलक होने का दावा किया जाता है। इन्हीं फिल्मों में से एक है ‘द एक्सॉर्सिज्म ऑफ एमिली रोज’, जिसने न सिर्फ डराया बल्कि अपनी सच्चाई को लेकर भी काफी चर्चा बटोरी।

2005 में रिलीज़ हुई यह फिल्म एक कानूनी ड्रामा और हॉरर का मिश्रण है, जिसमें एक युवती के कथित भूत-प्रेत से प्रभावित होने और उसके बाद हुए कानूनी केस को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे मुकदमे पर आधारित बताई जाती है, जिसमें एक पादरी पर एक लड़की की मौत के बाद लापरवाही का आरोप लगाया जाता है, जबकि बचाव पक्ष का दावा होता है कि वह “एक्सॉर्सिज्म” यानी आत्मा भगाने की प्रक्रिया कर रहा था।

कहानी की जड़ें कहां तक जाती हैं?

फिल्म का आधार एक वास्तविक घटना से प्रेरित बताया जाता है, जो 1970 के दशक की एक जर्मन युवती अन्नेलीज़ मिशेल (Anneliese Michel) के जीवन से जुड़ी है। कहा जाता है कि वह मानसिक और शारीरिक समस्याओं से जूझ रही थी और उसके परिवार ने इसे भूत-प्रेत का प्रभाव माना। इसके बाद उसके ऊपर कई बार एक्सॉर्सिज्म किए गए, और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद मामला अदालत तक पहुंचा और पादरियों तथा परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई। हालांकि, वैज्ञानिक और मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि अन्नेलीज़ मिशेल मानसिक बीमारी—जैसे स्किज़ोफ्रेनिया और एपिलेप्सी—से पीड़ित थी, और समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण उसकी हालत बिगड़ती गई।

फिल्म और हकीकत में अंतर

फिल्म ‘द एक्सॉर्सिज्म ऑफ एमिली रोज’ वास्तविक घटनाओं से प्रेरित जरूर है, लेकिन इसमें कई हिस्सों को ड्रामाई और हॉरर प्रभाव के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है। कोर्टरूम ड्रामा के रूप में कहानी को पेश किया गया है, जिसमें धार्मिक आस्था बनाम विज्ञान की बहस को केंद्र में रखा गया है। फिल्म का उद्देश्य केवल डर पैदा करना नहीं बल्कि यह सवाल उठाना भी है कि अंधविश्वास और चिकित्सा विज्ञान के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

दर्शकों पर असर और लोकप्रियता

रिलीज़ के बाद यह फिल्म हॉरर प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय हुई। कोर्टरूम सीन और एक्सॉर्सिज्म के दृश्य दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ते हैं। फिल्म ने यह भी चर्चा शुरू की कि क्या ऐसी घटनाओं को पूरी तरह अलौकिक मान लेना सही है या इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हो सकते हैं।

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