'विश्वगुरु' की कहानी से प्रभावित हुए मुकेश खन्ना, बोले- 'सेंसर' के बाद यह मेरी बड़ी फिल्म साबित हो सकती है
मुंबई, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेता मुकेश खन्ना ने अपनी आगामी फिल्म 'विश्वगुरु' के बारे में कहा कि इसके विषय से प्रभावित होकर उन्होंने इस प्रोजेक्ट में काम करने का फैसला किया। उनका यह भी मानना है कि देव आनंद की फिल्म 'सेंसर' के बाद यह फिल्म उनके लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट बन सकती है।
मुकेश खन्ना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि वे शुरू से ही इस विषय से आकर्षित थे और निर्माताओं के साथ कई बार चर्चाओं के बाद आखिरकार इस प्रोजेक्ट में काम करने के लिए राजी हो गए।
उन्होंने कहा, “मुझे विषय पसंद आया, मुझे कहानी अच्छी लगी। वो सही थे, हमारी तीन बैठकें हुईं और फिर हमने बात की।”
फिल्म निर्माता द्वारा उनसे संपर्क करने के बारे में बताते हुए खन्ना ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए राजी होने से पहले उनकी कई बार मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि तीन बार, वो मेरी मेज पर बैठे, बाहर गए, फिर अंदर आए, फिर बाहर गए, फिर अंदर आए। और अंत में, उन्होंने मेरे ऊपर रामबंध छोड़ दिया।
‘शक्तिमान’ अभिनेता ने यह भी याद किया कि उन्हें बताया गया था कि फिल्म में उन्हें हिंदी बोलनी होगी, जिस पर उन्होंने विषय पर विचार करने के बाद सहमति जताई। उन्होंने बातचीत के दौरान याद किया, “सर, आपको इस फिल्म में हिंदी बोलनी है और मैंने कहा, ठीक है, कोई बात नहीं। क्योंकि विषय...।”
खन्ना ने बताया कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए इतना खास क्यों है। उन्होंने कहा कि वे अक्सर फिल्में नहीं करते और उन्हें लगता है कि 'विश्वगुरु' बड़े पर्दे पर उनकी एक महत्वपूर्ण वापसी साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा, “देखिए, मैं बहुत कम फिल्में करता हूं और मैं खुलकर कहता हूं कि शायद देव आनंद की फिल्म 'सेंसर' के बाद मेरी कोई बड़ी फिल्म आने वाली है। लोग मेरा इंतजार कर रहे हैं, इसलिए मैंने यह फिल्म की, क्योंकि मुझे इसका विषय पसंद आया।”
देव आनंद की 2001 में आई फिल्म 'सेंसर' में मुकेश खन्ना ने एक भारतीय सेना अधिकारी का किरदार निभाया था। मुकेश खन्ना शक्तिमान और भीष्म पितामह जैसे प्रतिष्ठित किरदारों को निभाने के लिए जाने जाते हैं।
शैलेश बोगानी और अतुल सोनार द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक विदेशी समूह की कहानी है, जो छल और बल से भारत पर हमला करता है। कहानी बताती है कि कैसे आध्यात्मिक ज्ञान भारत की शक्ति बनता है और वैश्विक शिक्षक के रूप में देश की भूमिका को उजागर करती है।
--आईएएनएस
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