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बचपन में खुद नंगे पैर दौड़कर जलाती थीं पटाखे, अब मधु की लोगों से आतिशबाजी से परहेज की अपील

मुंबई, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री मधु ने लोगों से दीपावली का त्योहार बिना पटाखों के मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण न केवल लोगों की सेहत पर असर डालता है, बल्कि घरों में रहने वाले पालतू जानवर भी तेज आवाज से डर जाते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि लोगों के लिए पटाखों से दूर रहने की बात कहना आसान नहीं है, क्योंकि दीपावली से जुड़ी उनकी अपनी बचपन की कई खूबसूरत यादें हैं।

मुंबई, 28 अक्टूबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री मधु ने लोगों से दीपावली का त्योहार बिना पटाखों के मनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण न केवल लोगों की सेहत पर असर डालता है, बल्कि घरों में रहने वाले पालतू जानवर भी तेज आवाज से डर जाते हैं। हालांकि, उन्होंने माना कि लोगों के लिए पटाखों से दूर रहने की बात कहना आसान नहीं है, क्योंकि दीपावली से जुड़ी उनकी अपनी बचपन की कई खूबसूरत यादें हैं।

मधु ने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में दीपावली से जुड़ी अपनी यादों और इस साल त्योहार को खास बनाने वाली बात का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ''इस बार दीपावली के आसपास मेरे बच्चों का जन्मदिन भी है, इसलिए परिवार के लिए यह समय और भी खुशियों भरा है। मेरे लिए दीपावली पर पटाखे जलाना त्योहार का अहम हिस्सा हुआ करता था। मैं अपने कजिन्स के साथ पटाखों को लेकर लड़ती थी और एक-दूसरे को दिखाती थी कि कौन कितना बहादुर है। मैं हाथ में पटाखों की लड़ियां लेकर उन्हें जलाती थी और नंगे पैर इधर-उधर दौड़ती थी। उस समय मुझे इस बात की भी चिंता नहीं होती थी कि कहीं मेरे पैरों में चोट न लग जाए।''

मधु ने कहा, ''आज जब मैं लोगों से पटाखे न जलाने की अपील करती हूं, तो मुझे ऐसा लगता है, जैसे मैं अपने ही बचपन की खूबसूरत यादों को न कह रही हूं। मेरा मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए पटाखों से दूरी बनाना जरूरी है। शहर में वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर है और पटाखों से इसमें और इजाफा हो सकता है। कई लोग सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान हैं। ऐसे में त्योहार मनाते समय हमें उन लोगों के बारे में भी सोचना चाहिए, जिन्हें खराब हवा के कारण तकलीफ हो सकती है। दीपावली खुशियां बांटने का त्योहार है और इसे मनाते समय दूसरों की सेहत का ध्यान रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।''

मधु ने ध्वनि प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ''पटाखों की तेज आवाज लोगों को परेशान करती है और इसका असर पालतू जानवरों पर भी पड़ता है। खासकर कुत्ते तेज आवाज से घबरा जाते हैं। वे डर के मारे इधर-उधर भागने लगते हैं और कई बार उन्हें संभालना मुश्किल हो जाता है। मेरी पालतू जानवरों के मालिकों से भी अपील है कि वे अपने जानवरों की परेशानी को समझें और पटाखों के शोर को कम करने में मदद करें।''

उन्होंने कहा, ''दीपावली मनाने के लिए पटाखे जलाना जरूरी नहीं है। लोग रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर, दोस्तों और परिवार के लोगों से मिलकर, उन्हें गले लगाकर और मिठाइयां बांटकर भी त्योहार की खुशियां मना सकते हैं। दीपावली का असली मकसद प्यार, खुशी और अपनापन बांटना है, इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि हमारी खुशियों से किसी दूसरे को परेशानी न हो।''

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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