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गानों का ट्रेंड बदल सकता है लेकिन इंसान के सच्चे जज्बात नहीं : कैलाश खेर

मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। संगीत की दुनिया में कुछ समय बाद नया ट्रेंड देखने को मिलता है। ऐसे में कलाकारों पर बाजार की पसंद के हिसाब से गाने बनाने का दबाव बन जाता है लेकिन मशहूर गायक कैलाश खेर इस दौड़ से अलग हैं। इस पर उनका कहना है कि वह आज भी बदलते ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय उसी संगीत को ज्यादा महत्व देते हैं, जिसमें उन्हें जज्बात और सच्चाई नजर आती है। बता दें कि इन दिनों वह अपने नए गाने 'थम जा' को लेकर चर्चाओं में हैं।

मुंबई, 7 सितंबर (आईएएनएस)। संगीत की दुनिया में कुछ समय बाद नया ट्रेंड देखने को मिलता है। ऐसे में कलाकारों पर बाजार की पसंद के हिसाब से गाने बनाने का दबाव बन जाता है लेकिन मशहूर गायक कैलाश खेर इस दौड़ से अलग हैं। इस पर उनका कहना है कि वह आज भी बदलते ट्रेंड के पीछे भागने के बजाय उसी संगीत को ज्यादा महत्व देते हैं, जिसमें उन्हें जज्बात और सच्चाई नजर आती है। बता दें कि इन दिनों वह अपने नए गाने 'थम जा' को लेकर चर्चाओं में हैं।

कैलाश खेर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, ''जबसे मैंने संगीत की दुनिया में कदम रखा है, तब से मैं और मेरी टीम अपने तरीके से संगीत बनाने पर विश्वास करते आए हैं। मैंने अपने जज्बात, शब्दों, धुन और संगीत की अपनी शैली के साथ कभी समझौता नहीं किया। ट्रेंड में क्या चल रहा है, यह देखकर अपनी रचनात्मकता बदल देना मेरे काम करने का तरीका नहीं है।''

कैलाश ने कहा, ''म्यूजिक का ट्रेंड लगातार बदलता रहता है। आजकल गानों में ऐसी लाइनें या धुनों को शामिल करने पर जोर दिया जाता है, जो सुनते ही लोगों को पसंद आ जाए और सोशल मीडिया पर भी वायरल हो सके। मैं इस तरह से संगीत नहीं बनाता। मेरे लिए संगीत सिर्फ बाजार में चल रहे ट्रेंड के हिसाब से गाने बनाने का नाम नहीं है, गाने का मतलब सिर्फ उसकी लोकप्रियता नहीं है। मैं चाहता हूं कि गीत के शब्दों में कुछ ऐसा हो, जो सुनने वाले के दिल तक पहुंचे। इसी सोच के साथ मैं अपने म्यूजिक प्लेटफॉर्म 'कैलासा रिकॉर्ड्स' को भी आगे बढ़ा रहा हूं।''

उन्होंने कहा, ''यहां भी शब्दों और भावनाओं को खास महत्व दिया जाता है। हर शब्द को सोच-समझकर गढ़ना और उसमें भावना बनाए रखना मेरे लिए जरूरी है क्योंकि आखिरकार वही शब्द किसी गाने को सुनने वाले से जोड़ते हैं।''

कैलाश ने कहा, ''किसी गाने की असली ताकत उसके एहसास में होती है। बाजार में आज एक तरह का संगीत पसंद किया जा सकता है और कुछ समय बाद लोगों की पसंद बदल सकती है लेकिन इंसान के भीतर की भावनाएं नहीं बदलतीं।''

उन्होंने कहा, ''दुनिया में चाहे कितने भी बदलाव आ जाएं, चांद, सूरज, धरती, हवा और पानी आज भी वैसे ही हैं। बदलाव प्रकृति में कम और इंसान की सोच में ज्यादा आया है। इंसान का ज्ञान बढ़ा, उसकी समझ बदली और सोचने का तरीका भी बदला, लेकिन इसके साथ कई परेशानियां भी पैदा हुईं। जो लोग खुद को बहुत ज्यादा समझदार मानते हैं, वे कई बार खुद ही निराश हो जाते हैं।''

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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