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फिल्म 'रूपा' से कमबैक करेंगे गोविंदा, शेयर किया लकी नंबर का दिलचस्प किस्सा

मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)।1990 के दशक में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, दमदार डांस और अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले एक्टर गोविंदा लंबे समय से फिल्मों से दूर थे। वह अब फिल्म 'रूपा' के जरिए वापसी करने के लिए तैयार हैं।

मुंबई, 13 जुलाई (आईएएनएस)।1990 के दशक में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग, दमदार डांस और अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले एक्टर गोविंदा लंबे समय से फिल्मों से दूर थे। वह अब फिल्म 'रूपा' के जरिए वापसी करने के लिए तैयार हैं।

अभिनेता ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि शायद उनकी किस्मत में यही लिखा था कि फिल्म इंडस्ट्री ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया, ताकि वह पहले से ज्यादा मजबूती के साथ वापसी कर सकें।

उन्होंने कहा कि शायद मेरी किस्मत में कई बार लोगों द्वारा नकारा जाना ही लिखा था। लोगों ने कहा कि अब यह फिल्मों में नजर नहीं आएगा, लेकिन मैं हर बार फिर से शुरुआत करता हूं। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि जो मैंने सोचा है और जिसकी लोग कल्पना भी नहीं कर सकते, वह इस फिल्म के जरिए सच हो जाए। यह फिल्म खास तौर पर युवाओं के लिए है। जब वे इसे सिनेमाघरों में देखेंगे, तो उनके सपनों को नई उड़ान मिलेगी। यह सब संभव है। मैं इस पर आध्यात्मिक बातें नहीं करना चाहता।

एक्टर गोविंदा ने यह भी बताया कि वह अंक ज्योतिष (न्यूमरोलॉजी) में बहुत यकीन रखते हैं। 14 नंबर मेरा लकी नंबर है। मेरा नाम भी अंक ज्योतिष के हिसाब से ही रखा गया है। मैंने बहुत कम उम्र में ही इसमें यकीन करना शुरू कर दिया था। मैं 14 साल का था। मुझ पर भगवान की कृपा थी। मैंने एक हफ्ते में 14 फिल्में साइन की थीं। फिर मैंने 14 साल तक सुपर-स्टारडम देखा। फिर मैं 14वीं लोकसभा में सांसद बना। मैंने 14 साल तक संघर्ष किया और फिर मैं फिल्मों में वापस आया। यह पहली बार है जब मैं 5 साल से ज्यादा इंतजार नहीं कर सका। मैं फिर से शुरुआत करूंगा और अब मुझे उम्मीद है कि सफर यहीं से शुरू हुआ है।

गोविंदा ने कहा कि जब मैं गांव में कहता था कि मैं हीरो बनूंगा, तो लोग मुझ पर हंसते थे। वे कहते थे, 'तुम न तो सिगरेट पीते हो, न शराब पीते हो, न नॉन-वेज खाते हो, न लहसुन-प्याज खाते हो। तुम हीरो कैसे बन सकते हो।

गोविंदा ने कहा कि लोग कहते थे कि अगर तुम डर के मारे भागोगे, तो साधु बन जाओगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मैंने वही किया जो मेरी मां ने सोचा था। अब मुझे लगता है कि यह फिल्म बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। ऐसी फिल्में बननी चाहिए। और बच्चों को आगे बढ़ना चाहिए।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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