'ऑटिज्म बीमारी नहीं, समझ और अपनापन चाहिए', ईशा सिंह ने समाज की सोच पर उठाए सवाल
मुंबई, 30 जून (आईएएनएस)। टीवी अभिनेत्री ईशा सिंह इन दिनों अपने आने वाले शो 'जूही मुई' को लेकर चर्चा में हैं। इस शो में वह अपने करियर का अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने जा रही हैं। ईशा इसमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाली लड़की 'जूही' की भूमिका में नजर आएंगी। अपने इस किरदार की तैयारी और ऑटिज्म को लेकर समाज में फैली गलतफहमियों पर अभिनेत्री ने खुलकर बात की।
उन्होंने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग ऑटिज्म को बीमारी समझते हैं, जबकि यह एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है।
आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में ईशा सिंह ने कहा, ''आज भी बहुत से लोग ऑटिज्म को सही तरीके से नहीं समझते। जागरूकता की कमी पढ़े-लिखे लोगों के बीच भी देखने को मिलती है। मेरे अपने दोस्तों में भी ऐसे लोग हैं जिन्हें ऑटिज्म के बारे में सही जानकारी नहीं है। ऐसे में सबसे जरूरी बात यह है कि लोग इस विषय को समझें और इसके बारे में सही जानकारी हासिल करें।''
ईशा सिंह ने कहा, ''ऑटिज्म को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोग इसे बीमारी मान लेते हैं। जबकि सच यह है कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क के विकास से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। कुछ माता-पिता यह सोचते हैं कि ऑटिज्म एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, जबकि यह पूरी तरह गलत धारणा है। ऑटिज्म न तो संक्रामक है और न ही यह किसी तरह की बीमारी है।''
अभिनेत्री का कहना है कि ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाले बच्चे अक्सर बेहद बुद्धिमान, संवेदनशील और प्यार करने वाले होते हैं। उन्हें समाज से सहानुभूति नहीं बल्कि समझ और स्वीकार्यता की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों को बदलने की कोशिश करने के बजाय उन्हें उसी रूप में स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति अपनी अलग पहचान और विशेषताओं के साथ दुनिया में आता है।
अपने नए शो में निभाए जा रहे किरदार को लेकर ईशा सिंह ने कहा, ''यह मेरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी भरा रोल है। चूंकि यह एक बेहद संवेदनशील विषय है, इसलिए मैंने इसकी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़ी। मेरा उद्देश्य ऑटिज्म से जुड़े लोगों की भावनाओं और व्यवहार को पूरी ईमानदारी के साथ दर्शकों तक पहुंचाना था।''
ईशा ने कहा, ''इस किरदार की तैयारी के दौरान मैंने ऑटिज्म पर आधारित कई इंटरव्यू देखे, विशेषज्ञों और लोगों से बातचीत की, इस विषय पर काफी रिसर्च की और कई किताबें भी पढ़ीं। यह सीखने की प्रक्रिया अभी भी जारी है। जूही का किरदार निभाते हुए मुझे हर दिन कुछ नया सीखने को मिल रहा है। मैंने अपने स्टडी, लोगों के अनुभव और अपनी व्यक्तिगत समझ को मिलाकर इस किरदार को तैयार किया है।''
अभिनेत्री ने बताया, ''जूही के किरदार के लिए मुझे अपने चलने, बोलने, बैठने, प्रतिक्रिया देने और भावनाओं को व्यक्त करने के तरीके पर भी बारीकी से काम करना पड़ा। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम पर रहने वाले लोग हर भावना को गहराई से महसूस करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे उसे सामान्य तरीके से व्यक्त कर पाएं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैंने अपने अभिनय में किसी तरह का दिखावा नहीं रखा, बल्कि छोटे-छोटे हाव-भाव और स्वाभाविक अभिव्यक्ति पर विशेष ध्यान दिया।''
ईशा सिंह ने कहा, ''मुझे विश्वास है कि जब दर्शक 'जूही मुई' देखेंगे तो उन्हें मेरे किरदार की कई ऐसी बारीकियां नजर आएंगी, जिन पर पूरी टीम ने काफी मेहनत की है। अगर इस शो के जरिए कुछ लोग भी ऑटिज्म को लेकर अपनी सोच बदलते हैं और इसे सही तरीके से समझ पाते हैं, तो मेरी मेहनत सफल मानी जाएगी।''
--आईएएनएस
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