'जब खुली किताब' में खुलेंगी पचास साल पुराने रिश्ते की परतें, उम्रदराज प्रेम पर बनी अनोखी फिल्म
मुंबई, 2 मार्च (आईएएनएस)। सिनेमा में रिश्तों और शादी जैसे विषयों पर बनने वाली फिल्मों में अक्सर युवा प्रेम को दिखाया जाता है, लेकिन उम्रदराज दंपति के रिश्ते की परतें बहुत कम देखने को मिलती हैं। इस बीच एक ऐसी ही फिल्म 'जब खुली किताब' एक अलग कहानी लेकर आ रही है।
इसी बीच मेकर्स ने फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया, जिसमें अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया अपने किरदार 'अनुसूया' को बेहतरीन तरीके से निभाती नजर आई हैं।
डिंपल कपाड़िया ने कहा, "यह फिल्म मेरे लिए बेहद खास है। इसकी कहानी मजबूत है, सभी कलाकार शानदार हैं, और निर्देशक का विजन साफ और संवेदनशील है। फिल्म के जरिए मुझे पहाड़ों की खूबसूरती और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा के बीच काम करने का मौका मिला। इससे मेरा अनुभव ज्यादा खास हो गया।''
उन्होंने 'अनुसूया' के बारे में बात करते हुए कहा, ''यह किरदार गहराई और सच्चाई से लिखा गया है। अनुसूया अपने रिश्ते में ईमानदारी लाना चाहती है। रिश्ते में जब साल बीत जाएं, तो कड़वाहट को लेकर सच बोलना आसान नहीं होता। इसके लिए भावनात्मक साहस चाहिए। मुझे अपने किरदार की यह बात बेहद अच्छी लगी कि अनुसूया की नीयत अपने पति को चोट पहुंचाने की नहीं, बल्कि खुद से और अपने रिश्ते से सच्चा होने की है।''
फिल्म को सौरभ शुक्ला ने लिखा और निर्देशित किया है। कहानी एक ऐसे दंपति की है, जिन्होंने साथ में पचास साल बिताए हैं। उनकी जिंदगी में रोजमर्रा की आदतें, साझा यादें और एक समझ है। इस दंपति में पति 'गोपाल' का किरदार पंकज कपूर निभा रहे हैं। ट्रेलर में गोपाल और अनुसूया की साधारण जिंदगी दिखाई गई है। वे एक-दूसरे को बिना कहे समझ लेते हैं। लेकिन, जब अनुसूया एक पुराना राज खोलती है, तो गोपाल की दुनिया हिल जाती है।
गोपाल इस सच्चाई से टूट जाता है और आखिर में तलाक लेने का फैसला करता है। यह फैसला वह अंदर चल रही भावनाओं की उलझनों के कारण लेता है। फिल्म इसी मोड़ पर दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या पचास साल का रिश्ता एक सच से खत्म हो सकता है या उसमें फिर से समझ और माफी की जगह बन सकती है।
पंकज कपूर ने कहा, ''आमतौर पर फिल्मों में युवा प्रेम कहानियां दिखाई जाती हैं, लेकिन यहां उम्र के उस पड़ाव की बात हो रही है, जहां लोग जीवन का बड़ा हिस्सा साथ बिता चुके होते हैं। यह कहानी दिखाती है कि प्यार उम्र के साथ खत्म नहीं होता, बल्कि उसका रूप बदल जाता है। कभी वह जटिल हो जाता है, कभी चोट देता है, तो कभी मरहम का काम करता है।''
कहानी में एक अहम किरदार एक युवा वकील का भी है, जिसे अपारशक्ति खुराना ने निभाया है। जब गोपाल तलाक का फैसला लेते हैं, तो वे इसी वकील के पास पहुंचते हैं। यह युवा वकील दोनों के रिश्ते के लिए एक आईने की तरह काम करता है। उनके साथ बातचीत के दौरान पुराने जख्म, अधूरी बातें और दबे हुए जज्बात सामने आने लगते हैं।
अपारशक्ति खुराना ने कहा, ''मुझे इस फिल्म में सबसे ज्यादा यह बात पसंद आई कि माफी और रिश्तों को दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया को बहुत सहज तरीके से दिखाया गया है। फिल्म भारी-भरकम संवादों के बजाय सादगी और सच्चाई से दिल को छूती है। यह एक दुर्लभ कहानी है, जो दर्शकों को अपने जीवन और रिश्तों पर सोचने के लिए प्रेरित करेगी।''
'जब खुली किताब' 6 मार्च को जी5 पर रिलीज होगी।
--आईएएनएस
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