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काम में है जीवन की चिंताओं को दूर करने की ताकत, ये रुका तो सब रुक जाएगा: अमिताभ बच्चन

मुंबई, 26 जून (आईएएनएस)। मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने एक नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि काम में जिंदगी की चिंताओं को दूर करने की ताकत होती है। उन्होंने सभी को फोकस बनाए रखने और आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुंबई, 26 जून (आईएएनएस)। मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने एक नोट शेयर किया, जिसमें उन्होंने कहा कि काम में जिंदगी की चिंताओं को दूर करने की ताकत होती है। उन्होंने सभी को फोकस बनाए रखने और आगे बढ़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

अभिनेता ने अपने ब्लॉग पर लिखा, "आज का काम खत्म हुआ और अब अपने पर काम करना है। जब आप काम करते हैं, तो काम उन सभी चिंताओं का ध्यान रखता है जो हो सकती हैं। जब काम रुक जाता है, तो बाकी सब कुछ भी रुक जाता है। इसे जारी रखें। प्यार।"

इससे पहले 22 जून को अभिनेता ने बताया था कि उन्होंने हॉलीवुड स्टार टॉम हैंक्स की आवाज में बनी दूसरे विश्व युद्ध की डॉक्यूमेंट्री देखने में कुछ समय बिताया। उन्होंने ब्लॉग पर लिखा, "टॉम हैंक्स की आवाज में दूसरे विश्व युद्ध पर बनी डॉक्यूमेंट्री देखी और युद्ध की निरर्थकता को महसूस किया। लाखों बेगुनाह लोगों की जान चली गई, पर किसलिए? अक्सर किसी एक व्यक्ति की सनक और अहंकार की वजह से... और नतीजा क्या निकला?"

उन्होंने कहा, "हथियार, युद्ध की मशीनरी, बेरहमी से की गई हत्याएं और ऐसी मान्यताएं जिनका शांतिपूर्ण दुनिया में कोई स्थान नहीं है... और एआई इन सबको एक साथ दिखाता है। 1939 में पोलैंड पर हमले से लेकर युद्ध के अंत और परमाणु युग की शुरुआत तक का संघर्ष, जिसमें न केवल रणनीति और नेताओं पर बल्कि आम सैनिकों और नागरिकों की पीड़ा पर भी जोर दिया गया है।"

उन्होंने कहा कि "युद्ध की निरर्थकता का विचार कई बातों को देखने-समझने से आता है।" उन्होंने कहा, "करोड़ों लोग मारे गए, फिर भी इसमें शामिल लगभग हर देश का मानना ​​था कि वे जरूरत के कारण ऐसा कर रहे थे। शहर बर्बाद हो गए, आबादी विस्थापित हो गई और पूरे समुदाय खत्म हो गए। यहां तक ​​कि जीतने वालों को भी भारी नुकसान और सदमे का सामना करना पड़ा। इस युद्ध ने एक अत्याचार का तो अंत किया, लेकिन दुनिया को नए तनावों का सामना करने के लिए छोड़ दिया, जिनमें कोल्ड वॉर और परमाणु हथियार शामिल थे। इसमें लोगों के साहस की मिसालें भी देखने को मिलती हैं, लेकिन ये सब भारी मानवीय त्रासदी के बीच होता है। दूसरे विश्व युद्ध पर बनी गंभीर डॉक्यूमेंट्रीज़ में अक्सर यह बात सामने आती है कि युद्ध भले ही कभी-कभी अपरिहार्य हो, लेकिन जो लोग इसे झेलते हैं, उनके नजरिए से यह कभी भी गौरवपूर्ण नहीं होता।"

काम की बात करें तो, 80 साल से ज्यादा की उम्र में भी वह एक्टिव हैं। अभी नाग अश्विन के निर्देशन में बन रही फिल्म 'कल्कि 2898 एडी' के सीक्वल पर काम कर रहे हैं। यह फिल्म एक शानदार पौराणिक साइंस-फिक्शन फिल्म है जिसमें कमल हासन, प्रभास, दीपिका पादुकोण और दिशा पाटनी भी हैं।

इस फिल्म का पहला भाग साल 2898 एडी में काशी शहर के एक ऐसे भविष्य पर आधारित है जो बहुत खराब हालात वाला (डिस्टोपियन) है। कहानी एक ऐसे ग्रुप के बारे में है जो लैब सब्जेक्ट एसयूएम-80 के होने वाले बच्चे की रक्षा करने के मिशन पर है। माना जाता है कि यह बच्चा कल्कि है, जो विष्णु का आखिरी अवतार है।

--आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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