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Happy Birthday Pankaj Tripathi : 7 दिन जेल में बिताए, होटल में किया काम... जानिए कैसे 'कालीन भैया' बने पंकज त्रिपाठी

Happy Birthday Pankaj Tripathi : 7 दिन जेल में बिताए, होटल में किया काम... जानिए कैसे 'कालीन भैया' बने पंकज त्रिपाठी

हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेताओं में शामिल पंकज त्रिपाठी आज अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से निकलकर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले पंकज त्रिपाठी की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। बिना किसी फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखे उन्होंने थिएटर से शुरुआत की और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा तक का सफर तय किया। इसके बाद छोटे-छोटे फिल्मी किरदारों से आगे बढ़ते हुए वह आज हिंदी सिनेमा और OTT के सबसे चर्चित कलाकारों में गिने जाते हैं।

पंकज त्रिपाठी की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से हैं, जो उनके संघर्ष, जुनून और अभिनय के प्रति लगाव को दिखाते हैं। इनमें से एक बेहद भावुक किस्सा अभिनेता मनोज बाजपेयी से जुड़ा है, जब पंकज ने अपने पसंदीदा अभिनेता की होटल में छूटी चप्पल को अपने पास रख लिया था।

जब होटल में मनोज बाजपेयी के आने की खबर मिली

फिल्मों में पहचान मिलने से पहले पंकज त्रिपाठी पटना के मशहूर होटल मौर्य में किचन सुपरवाइजर की नौकरी किया करते थे। नौकरी के साथ वह थिएटर में भी सक्रिय थे और अभिनय के अपने सपने को जिंदा रखे हुए थे।

एक बार उन्हें पता चला कि अभिनेता मनोज बाजपेयी होटल में ठहरे हुए हैं। पंकज मनोज बाजपेयी के बहुत बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने होटल के स्टाफ से कह रखा था कि अगर मनोज बाजपेयी के कमरे से कोई ऑर्डर आए तो उन्हें जरूर बताया जाए।

कुछ समय बाद मनोज के कमरे से ऑर्डर आया। पंकज ने होटल में मौजूद सेबों में से सबसे अच्छे सेब चुनवाए और उन्हें खास तरीके से पैक करवाकर उनके कमरे में भिजवाया।

इसके साथ ही उन्होंने वेटर से अनुरोध किया कि मनोज बाजपेयी से कहा जाए कि एक लड़का उनसे मिलना चाहता है और थिएटर करता है।

इसके बाद पंकज खुद मनोज बाजपेयी के कमरे तक पहुंचे। उन्होंने अभिनेता को प्रणाम किया और पैर छूकर अपना परिचय दिया। पंकज ने बताया कि वह भी थिएटर करते हैं। कुछ देर बातचीत के बाद वह वापस लौट आए।

मनोज की चप्पल ने पंकज को कर दिया भावुक

अगली सुबह मनोज बाजपेयी होटल से चेकआउट कर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए। लेकिन जाते समय उनकी एक हवाई चप्पल होटल के कमरे में ही छूट गई।

हाउसकीपिंग के कर्मचारी ने जब पंकज को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ‘तुम्हारे मनोज बाजपेयी चप्पल छोड़ गए हैं’, तो पंकज ने चप्पल को हाउसकीपिंग में जमा कराने से मना कर दिया और उसे अपने पास रख लिया।

पंकज ने इस घटना को याद करते हुए बताया था कि उनके मन में एकलव्य की कहानी चल रही थी। उन्होंने भावुक होकर कहा था कि अगर वह मनोज की चप्पल में अपना पैर डाल लेंगे तो उन्हें एकलव्य की तरह अपने गुरु से जुड़ाव महसूस होगा।

यह किस्सा सुनाते हुए पंकज त्रिपाठी कपिल शर्मा के शो में भावुक हो गए थे और उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे।

जन्मतिथि को लेकर भी है दिलचस्प कहानी

पंकज त्रिपाठी की जन्मतिथि को लेकर भी एक रोचक कहानी है। उनके कई आधिकारिक दस्तावेजों और प्रोफाइल में जन्म की तारीख 5 सितंबर 1976 दर्ज है। हालांकि, पंकज खुद बता चुके हैं कि उनकी वास्तविक जन्मतिथि 28 सितंबर 1976 है।

उन्होंने बताया था कि स्कूल में दाखिले के दौरान उनके भाई से उनकी जन्मतिथि पूछी गई थी। भाई को सही तारीख याद नहीं थी, जिसके चलते 5 सितंबर तारीख दर्ज हो गई। बाद में यही तारीख उनके आधिकारिक दस्तावेजों में भी चलती रही।

छात्र राजनीति के दौरान पहुंचे जेल

पंकज त्रिपाठी की जिंदगी में ऐसा दौर भी आया, जब उन्हें करीब एक सप्ताह जेल में बिताना पड़ा था। कॉलेज के दिनों में वह छात्र राजनीति से जुड़े हुए थे।

साल 1993 में मधुबनी में छात्रों पर हुई गोलीबारी के विरोध में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस आंदोलन के बाद उन्हें गिरफ्तार कर पटना की बेऊर जेल भेज दिया गया, जहां उन्होंने करीब सात दिन बिताए।

बताया जाता है कि जेल में बिताया गया यह समय उनके लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हुआ। इस दौरान उन्हें अलग-अलग तरह के लोगों को करीब से देखने और समझने का मौका मिला। इसी अनुभव ने उनके व्यक्तित्व और सोच को भी प्रभावित किया।

जेल में रहते हुए उन्हें किताबें पढ़ने की आदत लगी। वहां मिले लोगों के स्वभाव और उनकी कहानियों को उन्होंने ध्यान से देखा, जिसका फायदा बाद में अभिनय करते समय किरदारों को समझने में भी मिला।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से मिली बड़ी पहचान

पंकज त्रिपाठी ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत छोटे किरदारों से की थी। साल 2004 में रिलीज हुई फिल्म ‘रन’ में उन्होंने एक छोटे रोल से फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद ‘ओमकारा’ समेत कई फिल्मों में वह छोटी भूमिकाओं में दिखाई दिए।

हालांकि, साल 2012 में अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। फिल्म में सुल्तान कुरैशी के उनके किरदार को दर्शकों ने काफी पसंद किया।

इसके बाद पंकज त्रिपाठी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने ‘फुकरे’, ‘मसान’, ‘निल बट्टे सन्नाटा’, ‘बरेली की बर्फी’, ‘न्यूटन’ और ‘स्त्री’ जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी अभिनय क्षमता साबित की।

OTT ने घर-घर पहुंचाया नाम

फिल्मों के साथ-साथ OTT की दुनिया में भी पंकज त्रिपाठी ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। ‘सेक्रेड गेम्स’, ‘मिर्जापुर’ और ‘क्रिमिनल जस्टिस’ जैसी वेब सीरीज में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।

‘मिमी’ में उनके शानदार अभिनय के लिए उन्हें 69वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार भी मिला। आज पंकज त्रिपाठी उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं, जिनकी पहचान किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं है। सहज अभिनय, संवाद अदायगी और किरदार में पूरी तरह ढल जाने की क्षमता ने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक खास नाम बना दिया है।

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