'गदर: एक प्रेम कथा' के सेट पर जब सनी देओल ही बन गए निर्देशक, अमीषा पटेल ने एक टेक में पूरा किया सीन
मुंबई, 2 जुलाई (आईएएनएस)। 15 जून 2001 को रिलीज हुई फिल्म 'गदर: एक प्रेम कथा' अपने दौर की बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म रही। इस फिल्म के सीक्वल 'गदर 2' ने भी बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था। फिल्म में सनी देओल और अमीषा पटेल की जोड़ी को काफी पसंद किया गया था। अब फिल्म से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी अभिनेत्री अमीषा पटेल ने 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' में साझा की।
शो में अमीषा पटेल ने कहा, '''गदर: एक प्रेम कथा' की शूटिंग के दौरान मैं इंडस्ट्री में बिल्कुल नई थी। मेरे लिए यह एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट था और साथ ही एक बड़ा दबाव भी। उसी समय मैं एक और बड़ी फिल्म 'कहो ना… प्यार है' की शूटिंग भी कर रही थी, जिससे मेरा शेड्यूल और भी मुश्किल हो गया था। दो अलग-अलग तरह की फिल्मों को एक साथ संभालना मेरे लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था और यह दौर मेरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण समय बन गया था।''
अमीषा ने कहा, ''फिल्म में मैंने सकीना का किरदार निभाया था, जिसके चलते काफी समझ की जरूरत थी। कई बार ऐसा होता था कि मैं इमोशनल सीन में सही परफॉर्म नहीं कर पाती थीं और शूटिंग रुक जाती थी। इस वजह से निर्देशक अनिल शर्मा को बार-बार रिटेक लेने पड़ते थे और कई बार वह इससे परेशान भी हो जाते थे।''
उन्होंने कहा, ''उस समय सेट पर माहौल काफी दबाव वाला होता था, क्योंकि लगातार रिटेक के कारण शूटिंग आगे नहीं बढ़ पा रही थी। इस दौरान अभिनेता सनी देओल ने काफी मदद की। उन्होंने मेरे संघर्ष को समझा। कई बार वे निर्देशक से यह भी कहते थे कि उन्हें कुछ समय के लिए सेट से बाहर जाने दिया जाए और फिर खुद सीन को संभालते थे।''
अमीषा ने बताया, ''सनी देओल कई मौकों पर खुद एक तरह से डायरेक्टर की भूमिका में आ जाते थे। वे मुझे सीन समझाते थे और सही इमोशन्स लाने में मदद करते थे, जिसके बाद मेरा शॉट अक्सर एक ही टेक में पूरा हो जाता था। यह मेरे लिए बहुत बड़ा सहारा था, क्योंकि उस समय मैं सीखने की प्रक्रिया में थीं और हर दिन कुछ नया अनुभव कर रही थीं।''
उन्होंने बताया, ''सनी देओल असल जिंदगी में बहुत शांत और शर्मीले स्वभाव के हैं, लेकिन उनके साथ मेरा रिश्ता शूटिंग के दौरान बहुत मजबूत हो गया था। सेट पर कई लोग यह देखकर हैरान होते थे कि एक नई अभिनेत्री और इतने बड़े स्टार के बीच इतनी अच्छी बॉन्डिंग कैसे बन गई। वह हमेशा मेरे साथ खड़े रहते थे और अगर मुझे किसी भी तरह की परेशानी होती थी, तो वे तुरंत मदद के लिए आगे आ जाते थे।''
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