Samachar Nama
×

फिल्मों से मिली शोहरत, प्यार में अधूरापन, कुछ ऐसी रही राखी की जिंदगी

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। 15 अगस्त का दिन देश के लिए आजादी का जश्न लेकर आता है, लेकिन इसी दिन हिंदी सिनेमा को एक ऐसी अदाकारा भी मिली, जिसने अपनी मासूमियत, खूबसूरती और शानदार अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। हम बात कर रहे हैं राखी गुलजार की।

नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। 15 अगस्त का दिन देश के लिए आजादी का जश्न लेकर आता है, लेकिन इसी दिन हिंदी सिनेमा को एक ऐसी अदाकारा भी मिली, जिसने अपनी मासूमियत, खूबसूरती और शानदार अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया। हम बात कर रहे हैं राखी गुलजार की।

1947 में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में जन्मीं राखी ने अपने फिल्मी सफर में नायिका से लेकर मां तक हर किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया कि वह हिंदी सिनेमा की यादगार अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। हालांकि, फिल्मों से उनको जितनी शोहरत मिली, निजी जिंदगी उतनी ही उतार-चढ़ाव से भरी रही।

महज 16 साल की उम्र में राखी की शादी बंगाली फिल्म निर्देशक अजय विश्वास से हो गई थी। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चल सका और करीब दो साल बाद दोनों अलग हो गए। शादी टूटने के बाद राखी ने खुद को संभाला और अपना पूरा ध्यान करियर पर लगा दिया।

साल 1967 में राखी ने बंगाली फिल्म 'बधू बरण' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 1970 में उन्हें हिंदी फिल्म 'जीवन मृत्यु' में धर्मेंद्र के साथ काम करने का मौका मिला। यह फिल्म उनके हिंदी फिल्मी सफर की अहम शुरुआत बनी। इसके बाद राखी के पास फिल्मों की लाइन लगने लगी और 70 का दशक उनके करियर का सुनहरा दौर बन गया।

1971 में आई 'शर्मीली' ने राखी को घर-घर में पहचान दिलाई। इस फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया और दोनों किरदारों में अपनी अलग छाप छोड़ी। इसके बाद 'लाल पत्थर', 'पारस', 'दाग', 'कभी-कभी', 'त्रिशूल', 'कसमें वादे', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'काला पत्थर' जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और मजबूत किया। शशि कपूर के साथ उनकी जोड़ी भी दर्शकों को खूब पसंद आई। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री यादगार रही।

करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था, तभी राखी की जिंदगी में गुलजार की एंट्री हुई। मशहूर गीतकार, कवि और निर्देशक गुलजार के साथ उनकी मुलाकात धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। दोनों ने 1973 में शादी कर ली। शादी के बाद राखी के नाम के साथ 'गुलजार' जुड़ गया और वह राखी गुलजार के नाम से पहचानी जाने लगीं। इसी साल उनकी बेटी मेघना गुलजार का जन्म हुआ, जो आगे चलकर फिल्म निर्देशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहीं।

लेकिन राखी और गुलजार की प्रेम कहानी का सफर वैसा नहीं रहा, जैसा दोनों ने सोचा था। शादी के बाद राखी ने कुछ समय के लिए फिल्मों से दूरी बना ली। दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। कहा जाता है कि राखी फिर से फिल्मों में काम करना चाहती थीं, जबकि गुलजार चाहते थे कि वह शादी के बाद फिल्मों से दूर रहें। इसी बात को लेकर दोनों के बीच मतभेद बढ़ने लगे।

उनके रिश्ते से जुड़ा एक चर्चित किस्सा फिल्म 'आंधी' के दौर का भी बताया जाता है। कश्मीर में फिल्म की शूटिंग के दौरान एक घटना के बाद राखी और गुलजार के बीच विवाद बढ़ गया था। हालांकि इस किस्से के अलग-अलग संस्करण मिलते हैं, लेकिन इतना जरूर है कि इसके बाद दोनों के रिश्ते में दूरी बढ़ती गई। इसके बाद राखी और गुलजार के बीच दुरियां और बढ़ने की खबरें आने लगी थी।

राखी ने नायिका के तौर पर शानदार काम करने के बाद मां और सशक्त महिला किरदारों को भी उतनी ही खूबसूरती से निभाया। 'राम लखन', 'बाजीगर', 'खलनायक', 'करण अर्जुन', 'बॉर्डर', 'सोल्जर' और 'एक रिश्ता' जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं।

राखी को 1990 में 'राम लखन' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके अलावा 'तपस्या' और 'दाग' के लिए भी उन्हें फिल्मफेयर सम्मान मिला। 2003 में आई बंगाली फिल्म 'शुभ मुहूर्त' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसी साल उन्हें पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस

Share this story