दिलीप कुमार का जिक्र कर भावुक हुईं सायरा बानो, इंसानियत को बताया भारत की असली आत्मा
मुंबई, 26 जनवरी (आईएएनएस)। अभिनेत्री सायरा बानो ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर देशवासियों को खास अंदाज में बधाई दी। सोशल मीडिया पर किए पोस्ट में उन्होंने लिखा कि गणतंत्र दिवस उनके लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि यह हमेशा एक गहरा एहसास रहा है।
सायरा ने बताया कि बचपन में वह इंग्लैंड चली गई थीं और काफी समय लंदन में बिताया। लेकिन दूरी ने भारत से उनके जुड़ाव को कम नहीं किया, बल्कि उसे और मजबूत बनाया। उन्होंने कहा, “जितना दूर गई, मेरा देश उतना ही करीब आया। दूर रहकर मुझे एक महत्वपूर्ण बात समझ आई कि देशों को उनकी सीमाओं या इमारतों से नहीं, बल्कि उनकी इंसानियत से याद किया जाता है।"
उन्होंने लिखा कि शांति और इंसानियत अलग-अलग लग सकते हैं, लेकिन एक के बिना दूसरा नहीं टिक सकता। सच्ची शांति तभी पैदा होती है, जहां इंसानियत जिंदा रहती है। भारत के हर कोने में भीड़ भरी सड़कों से लेकर शांत गांवों तक एक अनकहा सच है। हम अलग दिखते हैं, अलग भाषाएं बोलते हैं, अलग रीति-रिवाज मानते हैं, लेकिन हमारे दिल एक ही भावना से धड़कते हैं, मदद करने, परवाह करने और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने की।
सायरा ने छोटे-छोटे पलों का जिक्र किया जो हमें सबसे ज्यादा परिभाषित करते हैं। जैसे किसी अजनबी की भरोसे भरी नजर, मुश्किल में बढ़ाया हुआ हाथ या बिना आम भाषा के साझा की गई हंसी।
उन्होंने दिवंगत पति और अभिनेता दिलीप कुमार का खास तौर पर जिक्र किया। सायरा ने लिखा, ''दिलीप साहब इस भावना में बहुत विश्वास करते थे। वह अक्सर कहते थे कि भारत की आत्मा उसके स्मारकों या इतिहास की किताबों में नहीं, बल्कि उसके लोगों में है, उनकी दयालुता, सहानुभूति और दूसरों को ऊपर उठाने के विश्वास में है। उनके लिए इंसानियत कोई आदर्श नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी थी।''
उन्होंने कहा, "जब विनम्रता हमारा मार्गदर्शन करती है, तो असंभव भी संभव हो जाता है। जाति, संस्कृति, भाषा या विश्वास की सारी विविधताओं के बावजूद हमें सच में एकजुट करने वाली चीज है, हर इंसान के लिए सम्मान। यही वह भारत था, जिसमें दिलीप साहब विश्वास करते थे और यही वह भारत है, जिसकी हमें रक्षा करनी चाहिए। आप सभी को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।"
--आईएएनएस
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