धर्म-जाति से उठकर अगर हम पहले भारतीय बनें तो कई समस्याएं खत्म हो जाएंगी: असित मोदी
मुंबई, 8 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय लोकप्रिय हास्य धारावाहिक 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' के प्रोड्यूसर असित मोदी ने हाल ही में अपने सीरियल के 18 साल पूरे कर लिए हैं। प्रोड्यूसर ने आईएएनएस के साथ हालिया बातचीत में समाज में बढ़ते धर्म, जाति और भाष के मोह पर तंज कसते हुए कहा कि लोगों को खुद को सबसे पहले भारतीय मानना चाहिए। इससे आपसी भाईचारा बढ़ेगा और साथ मिलकर रहने की भावना मजबूत होगी।
प्रोड्यूसर का मानना है कि आज के समय में हम, जब किसी से भी मिलते हैं, तो सबसे पहले यही सवाल रहता है कि आप किस धर्म से हैं, जाति क्या है, किस समुदाय से आते हैं या फिर कौन सी भाषा बोलते हैं? मैं हमेशा कहता हूं कि अगर हम सबसे पहले कहें कि मैं भारतीय हूं, तो यह समस्या हल हो जाएगी और सब लोग मिल-जुलकर रह सकेंगे।"
उन्होंने अपनी बचपन की बातों को याद करते हुए कहा कि जब हम मुंबई की चॉल में रहते थे, तब वहां पर पड़ोसियों को परिवार की तरह माना जाता था। उन्होंने कहा, "मैं और दिलीप भाई हम दोनों चॉल में रहे हैं। मुंबई में, चाहे भूलेश्वर हो, कालबादेवी हो या दादर, हम सब चॉलों में रहते थे। पड़ोसी ही हमारा परिवार बन जाते थे, क्योंकि घर छोटे होते थे। आज की तरह न्यूक्लियर फैमिली (छोटा परिवार) का कॉन्सेप्ट तब नहीं था। आज भी मैं उन पड़ोसियों से जुड़ा हुआ हूं जो मेरे छह या सात साल की उम्र में मेरे पड़ोसी थे।"
असित मोदी ने कहा, "जब आप अपने पड़ोसियों के साथ रहते हैं तो आपको कई चीजें छोड़नी पड़ती हैं। आप मिल-जुलकर रहना सीखते हैं, रहना सीखते हैं और मुझे लगता है कि साथ मिलकर रहना बेहद जरूरी है। आज मुझे लगता है कि हमारे देश के लिए यह बहुत अहम है। आजकल लोग यह भी नहीं जानते कि उनके पड़ोस में कौन रहता है। कई लोग तो वॉचमैन या लिफ्ट ऑपरेटर से मुस्कुराकर बात तक नहीं करते। हमें वॉचमैन, लिफ्टमैन और हमारी सेवा करने वाले हर व्यक्ति का आभारी होना चाहिए। हमारा पड़ोसी ही हमारा पहला परिवार होता है। पड़ोसी ही सब कुछ है।"
प्रोड्यूसर असित मोदी ने बताया कि उनके शो 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' ने कई समुदायों को प्रेरणा दी। उनका कहना है कि शो ने सोसायटी में साथ रहने के तौर -तरीकों को हर किसी को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा, "हमारे शो का विचार सफल रहा है। इसी भावना के साथ कई कॉलोनियां बनी हैं। लोगों ने हमें बताया है कि वे ऐसे समुदाय बनाने के लिए हमारे शो से प्रेरित हुए हैं। मुझे राजकोट की एक कॉलोनी में जाने का न्योता भी मिला है। हम सभी को इस बारे में सोचना चाहिए कि हम साथ-साथ कैसे रह सकते हैं। भले ही विचारों में मतभेद हों, लेकिन हमें बहस में नहीं पड़ना चाहिए। हम सभी को यह सोचना चाहिए कि हम शांति से एक-दूसरे के साथ कैसे रह सकते हैं।"
--आईएएनएस
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