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बॉलीवुड की 'रामायण' के 'मंगल रंग' पर भारी पड़ा विवाद: हल्दी रस्म और धुन पर आपत्ति, मेकर्स से गाना बदलने की मांग!

बॉलीवुड की 'रामायण' के 'मंगल रंग' पर भारी पड़ा विवाद: हल्दी रस्म और धुन पर आपत्ति, मेकर्स से गाना बदलने की मांग!

रणबीर कपूर और साई पल्लवी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ का नया गाना ‘मंगल रंग’ रविवार को रिलीज किया गया। एआर रहमान के संगीत से सजे इस गाने को मशहूर गायकों अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। गाने में भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह से जुड़े कई खूबसूरत दृश्य दिखाए गए हैं। हालांकि, रिलीज होते ही यह गाना सोशल मीडिया पर चर्चा और विवाद का विषय बन गया।

एक ओर कुछ दर्शकों ने गाने के संगीत और उसकी धुन पर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर विवाह के एक दृश्य को लेकर भी मेकर्स को ट्रोल किया जाने लगा। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने गाने में कव्वाली और सूफी संगीत जैसी बीट्स के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। वहीं, राम और सीता के विवाह के दौरान दिखाई गई एक पारंपरिक रस्म को कुछ लोगों ने हल्दी की रस्म समझ लिया। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह दृश्य मिथिला क्षेत्र की पारंपरिक ‘चुमावन’ रस्म से जुड़ा है।

एआर रहमान के संगीत पर क्यों उठ रहे सवाल?

‘मंगल रंग’ गाने में एआर रहमान के संगीत को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि वाल्मीकि रामायण जैसे पौराणिक महाकाव्य पर आधारित फिल्म के संगीत में भारतीय शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत का अधिक इस्तेमाल होना चाहिए था।

कुछ लोगों ने गाने की धुन में सुनाई देने वाले सूफी और कव्वाली शैली के प्रभाव पर आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि भगवान श्रीराम और माता सीता की पावन कथा को दर्शाने वाले गीत का संगीत इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के अनुरूप होना चाहिए।

हालांकि, इस मुद्दे पर दर्शकों की राय बंटी हुई है। जहां कुछ लोग संगीत की शैली को लेकर आलोचना कर रहे हैं, वहीं अन्य दर्शक इसे फिल्म की रचनात्मक प्रस्तुति का हिस्सा मान रहे हैं। ऐसे में गाने को लेकर सोशल मीडिया पर बहस जारी है।

शादी के दृश्य को लेकर भी मचा बवाल

गाने के एक दृश्य में रणबीर कपूर को भगवान श्रीराम के रूप में दिखाया गया है, जबकि साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आती हैं। इस दृश्य में कुछ महिलाएं राम के माथे पर टीका लगाती और विवाह से जुड़ी रस्म निभाती दिखाई देती हैं।

इसी सीन को देखकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे हल्दी की रस्म समझ लिया। इसके बाद फिल्म के मेकर्स पर पारंपरिक हिंदू विवाह की रस्मों को गलत तरीके से दिखाने के आरोप लगाए जाने लगे। कुछ लोगों ने सवाल किया कि विवाह से पहले दूल्हा-दुल्हन की हल्दी की रस्म को इस तरह क्यों फिल्माया गया है।

लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, इस दृश्य को हल्दी की रस्म समझना सही नहीं है। बताया जा रहा है कि इसमें मिथिला और पूर्वी भारत में प्रचलित पारंपरिक ‘चुमावन’ रस्म को दर्शाया गया है।

क्या है पारंपरिक चुमावन रस्म?

चुमावन मिथिला क्षेत्र में विवाह के दौरान निभाई जाने वाली पारंपरिक रस्मों में से एक है। इसमें सुहागिन महिलाएं दूब, अक्षत, हल्दी और दही जैसी पारंपरिक सामग्रियों के माध्यम से वर को आशीर्वाद देती हैं।

इस रस्म के दौरान वर के चरणों, घुटनों, कंधों और सिर को स्पर्श करके शुभकामनाएं देने की परंपरा बताई जाती है। इसी तरह वधू के लिए भी यह रस्म अलग से निभाई जाती है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि ‘मंगल रंग’ के विवादित दृश्य में इसी परंपरा को दिखाने की कोशिश की गई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर कई दर्शकों ने इसे हल्दी की रस्म मानकर आलोचना शुरू कर दी। इस तरह एक पारंपरिक विवाह रस्म की प्रस्तुति गाने को लेकर छिड़ी बहस का बड़ा मुद्दा बन गई।

भगवान राम और माता सीता के विवाह की झलक दिखाता है ‘मंगल रंग’

‘मंगल रंग’ गाना भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह तथा उनके पवित्र संबंध को केंद्र में रखकर तैयार किया गया है। इसमें सीता स्वयंवर, भगवान राम द्वारा शिव धनुष उठाने, विवाह के वचनों और अयोध्या में नवविवाहित जोड़े के स्वागत जैसे प्रसंगों की झलक दिखाई गई है।

रणबीर कपूर भगवान श्रीराम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। गाने के जरिए फिल्म में राम-सीता के विवाह से जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं को भव्य अंदाज में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है।फिल्म के इस गाने ने रिलीज के साथ ही दर्शकों का ध्यान खींच लिया है। हालांकि, संगीत की शैली और विवाह की रस्मों के चित्रण को लेकर उठे सवालों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में दर्शकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।

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