ज्ञान मुखर्जी और फणी मजूमदार से बारीकियां सीखने वाले निर्देशक, जिन्होंने दीं 'कश्मीर की कली', 'अमर प्रेम' और 'आनंद'
मुंबई, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। आनंद, कश्मीर की कली, अमर प्रेम, हावड़ा ब्रिज और अमानुष ... ये कुछ ऐसी फिल्में हैं, जो सिनेमा जगत के लिए अमर हो गईं। ज्ञान मुखर्जी और फणी मजूमदार जैसे दिग्गज फिल्मकारों से सिनेमा की बारीकियां सीखने वाले शक्ति सामंत ने फिल्म इंडस्ट्री को ऐसी कई यादगार फिल्में दीं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसती हैं।
'कश्मीर की कली', 'अमर प्रेम', 'आनंद', 'आश्रम', 'आराधना' और 'अनुराग' जैसी फिल्मों के जरिए शक्ति सामंत ने रोमांस, संगीत और भावनाओं का अनोखा मेल पेश किया।
शक्ति सामंत हिंदी सिनेमा के एक बेहद सफल निर्माता और निर्देशक थे। उन्होंने न सिर्फ व्यावसायिक सफलता हासिल की, बल्कि अपनी फिल्मों के माध्यम से समाज में सकारात्मक जागृति फैलाने का भी प्रयास किया। उनकी फिल्मों में संस्कार और सरोकार दोनों ही तत्व खूबसूरती से दिखते थे।
13 जनवरी 1926 को पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में जन्मे शक्ति सामंत की शुरुआती पढ़ाई देहरादून में हुई। उन्होंने 1944 में कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। फिल्मों में अभिनय करने का सपना लेकर वे मुंबई आए, लेकिन शुरू में उन्हें दापोली के एक स्कूल में शिक्षक की नौकरी मिली। कुछ समय बाद वे फिल्म जगत में कदम रखे।
साल 1948 में शक्ति सामंत ने ‘सुनहरे दिन’ फिल्म के निर्देशक सतीश निगम के सहायक के रूप में काम करना शुरू किया। इसके बाद उन्होंने ज्ञान मुखर्जी और फणी मजूमदार जैसे उस समय के नामचीन फिल्मकारों के साथ काम किया और फिल्म निर्माण व निर्देशन की बारीकियां सीखीं। इन दिग्गजों से मिले अनुभव ने उन्हें एक बेहतर फिल्मकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साल 1954 में शक्ति सामंत को अपनी पहली फिल्म ‘बहू’ निर्देशित करने का मौका मिला। फिल्म में करण दीवान, उषा किरण, प्राण, जॉनी वॉकर और महमूद जैसे कलाकार थे। संगीत हेमंत कुमार ने दिया था। ‘बहू’ के बाद उन्होंने ‘हिल स्टेशन’, ‘शेरू’, ‘डिटेक्टिव’ और ‘इंस्पेक्टर’ जैसी फिल्में निर्देशित कीं।
साल 1957 में शक्ति सामंत ने अपना खुद का प्रोडक्शन बैनर ‘श्री शक्ति फिल्म्स’ शुरू किया। इस बैनर की पहली फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ थी, जो एक मर्डर मिस्ट्री थी। इसमें अशोक कुमार और मधुबाला मुख्य भूमिका में थे। संगीत ओपी नैयर ने दिया था। अपने पूरे करियर में शक्ति सामंत ने कुल 43 फिल्में निर्देशित कीं, जिनमें 37 हिंदी और 6 बांग्ला फिल्में शामिल थीं। उन्होंने ‘अमानुष’ फिल्म को हिंदी और बांग्ला दोनों भाषाओं में बनाया। उनकी फिल्मों में ‘जाली नोट’, ‘चाइना टाउन’, ‘कश्मीर की कली’, ‘सावन की घटा’, ‘कटी पतंग’, ‘पगला कहीं का’, ‘एन इवनिंग इन पेरिस’, ‘अजनबी’, ‘महबूबा’, ‘अनुरोध’, ‘आनंद आश्रम’ और ‘अमर प्रेम’ जैसी फिल्में आज भी क्लासिक मानी जाती हैं।
शक्ति सामंत सिर्फ फिल्में बनाने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने पांच साल तक मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में सेवा की। कोलकाता के सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट के दो साल तक अध्यक्ष रहे और कई सालों तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के भी अध्यक्ष रहे। उनकी तीन फिल्मों आराधना, अनुराग और अमानुष को फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला। उनकी कई फिल्में देश-विदेश के फिल्म समारोहों में दिखाई गईं और खूब सराही गईं।
--आईएएनएस
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