Samachar Nama
×

China Food Security: चीन में दोबारा अकाल न पड़े, इसके लिए शी जिनपिंग की रणनीति क्या है? जानिए इतिहास से जुड़ी वजह

China Food Security: चीन में दोबारा अकाल न पड़े, इसके लिए शी जिनपिंग की रणनीति क्या है? जानिए इतिहास से जुड़ी वजह

खाद्य सुरक्षा आज दुनिया के कई देशों के लिए बड़ी चुनौती है। बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, खेती की लागत और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराना सरकारों के लिए अहम हो गया है। चीन भी इस चुनौती से निपटने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने, अनाज का भंडार बनाए रखने और खेती में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देता रहा है।

चीन की खाद्य सुरक्षा नीति के पीछे उसके इतिहास का एक बेहद कठिन दौर भी है। 1959 से 1961 के बीच देश में पड़े भीषण अकाल ने लाखों लोगों की जान ली थी। इस त्रासदी का असर चीन की नीतियों और खाद्यान्न आपूर्ति को लेकर उसकी चिंताओं में आज भी देखा जाता है।

शी जिनपिंग के शुरुआती जीवन से जुड़ा खाद्य सुरक्षा का मुद्दा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का शुरुआती जीवन देश के राजनीतिक और सामाजिक बदलावों के दौर में बीता। वर्ष 2015 में अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने अपने शुरुआती जीवन और ग्रामीण चीन में बिताए समय का जिक्र किया था।

हालांकि, खाद्य सुरक्षा को लेकर उनकी नीतियों को केवल निजी अनुभवों का नतीजा मानना सही नहीं होगा। चीन की मौजूदा रणनीति के पीछे ऐतिहासिक अनुभवों के साथ-साथ बढ़ती आबादी की जरूरतें, कृषि भूमि का संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आर्थिक पहलू भी हैं।

माओ के दौर की नीतियों ने कैसे बढ़ाया अकाल का संकट?

चीन में 1958 में तत्कालीन नेता माओ त्से तुंग ने ‘ग्रेट लीप फॉरवर्ड’ अभियान शुरू किया था। इसका उद्देश्य देश में औद्योगिक और कृषि उत्पादन को तेजी से बढ़ाना था।

लेकिन इस अभियान के दौरान कृषि व्यवस्था में बड़े बदलाव, अवास्तविक उत्पादन लक्ष्य, गलत सरकारी नीतियां और अनाज की खरीद व वितरण से जुड़ी समस्याएं सामने आईं। इसके साथ ही प्राकृतिक परिस्थितियों और प्रशासनिक फैसलों ने संकट को और गंभीर बनाया।

1959 से 1961 के बीच पड़े अकाल में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। मृतकों की सटीक संख्या को लेकर इतिहासकारों के अनुमान अलग-अलग हैं, लेकिन इसे आधुनिक इतिहास की सबसे गंभीर मानवीय त्रासदियों में गिना जाता है।

इस घटना ने चीन के सामने यह स्पष्ट किया कि खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ सही वितरण, विश्वसनीय आंकड़े और प्रभावी प्रशासन भी जरूरी हैं।

खाद्य सुरक्षा के लिए चीन की रणनीति

चीन ने पिछले कई दशकों में खाद्य सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल किया है। इसकी रणनीति में कई प्रमुख पहलू शामिल हैं।

  • अनाज का भंडार: संकट के समय आपूर्ति बनाए रखने के लिए अनाज का भंडारण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • कृषि भूमि का संरक्षण: खेती योग्य जमीन को सुरक्षित रखना और उसका उपयोग कृषि उत्पादन के लिए बनाए रखना नीति का अहम हिस्सा है।
  • आधुनिक कृषि तकनीक: बेहतर बीज, कृषि मशीनरी, सिंचाई और वैज्ञानिक खेती के जरिए उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की जाती है।
  • घरेलू उत्पादन पर जोर: चीन गेहूं, चावल और अन्य प्रमुख खाद्य फसलों के घरेलू उत्पादन को मजबूत बनाए रखने की कोशिश करता है।
  • आपूर्ति व्यवस्था: उत्पादन के साथ अनाज की खरीद, परिवहन और वितरण व्यवस्था को सुचारु रखना भी जरूरी है।

क्या चीन में कभी खाद्यान्न संकट नहीं आ सकता?

चीन की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था व्यापक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वहां भविष्य में खाद्यान्न संकट की कोई संभावना नहीं है। जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़, खेती योग्य जमीन पर दबाव और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम चीन को भी प्रभावित कर सकते हैं।

इसी वजह से अनाज का पर्याप्त भंडार बनाए रखना, उत्पादन में विविधता लाना और आपूर्ति के वैकल्पिक साधन तैयार रखना महत्वपूर्ण है। किसी भी देश की खाद्य सुरक्षा का आकलन केवल कुल उत्पादन से नहीं, बल्कि लोगों तक भोजन की उपलब्धता और उसकी पहुंच से भी किया जाता है।

इतिहास से मिला सबक आज भी अहम

चीन में 1959-1961 का अकाल केवल अतीत की घटना नहीं है, बल्कि यह बताता है कि गलत नीतियां, प्रशासनिक विफलताएं और खाद्यान्न वितरण की समस्याएं कितनी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती हैं।

आज चीन कृषि उत्पादन और खाद्य भंडारण को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। हालांकि, किसी भी देश के लिए हमेशा खाद्यान्न संकट से पूरी तरह सुरक्षित रहने की गारंटी देना संभव नहीं है। प्रभावी नीतियां, वैज्ञानिक खेती और मजबूत वितरण व्यवस्था ही खाद्य सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं।

Share this story

Tags