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Gulshan Kumar Mehta Birth Anniversary : रोचक है गुलशन कुमार मेहता के 'गुलशन बावरा' बनने की कहानी, जानकर रह जाएंगे हैरान 

Gulshan Kumar Mehta Birth Anniversary : रोचक है गुलशन कुमार मेहता के 'गुलशन बावरा' बनने की कहानी, जानकर रह जाएंगे हैरान 

मनोरंजन न्यूज़ डेस्क -  गुलशन बावरा ने हिंदी सिनेमा के लिए 'मेरे देश की धरती सोना उगले' से लेकर 'यारी है ईमान मेरा' तक गाने लिखे हैं। लगभग हर अवसर के लिए गीत उनकी कलम से निकले। गुलशन बावरा अपने शुरुआती दिनों में क्लर्क की नौकरी करते थे। लेकिन वह शुरू से ही फिल्मों के लिए गाने लिखना चाहते थे। पहचान न मिलने के कारण उन्हें फिल्मों में काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद उन्हें 1959 में फिल्म सट्टा बाजार से सफलता मिली।

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यही वह फिल्म थी जिसके जरिए गुलशन कुमार मेहता गुलशन बावरा बन गए। फिल्म समीक्षक श्रीराम ताम्रकार ने बताया कि फिल्म 'सट्टा बाजार' के वितरक शांतिभाई पटेल गुलशन के काम से काफी खुश थे। रंग-बिरंगी शर्ट पहने करीब 20 साल के युवक को देखकर उन्होंने कहा कि मैं इसका नाम गुलशन बावरा रखूंगा। वह एक पागल व्यक्ति की तरह दिखता है।'' उन्होंने कहा, ''जब फिल्म रिलीज हुई थी, तो इसके पोस्टर में केवल तीन लोगों के नाम प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए थे। फिल्म के निर्देशक रवींद्र दवे, संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी और गीतकार गुलशन बावरा थे।

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दोस्ती, रोमांस, मौज-मस्ती, गम- जिंदगी के हर रंग के गानों को उन्होंने शब्द दिए। जंजीर का 'यारी है ईमान मेरा यार मेरी जिंदगी' जहां दोस्ती की कहानी कहता है, वहीं उन्होंने 'दुक्की पे दुक्की हो या सत्ते पे सत्ता' भी लिखा जो मस्ती के माहौल में डूबा हुआ है। चाहे वो बेधड़क प्यार करने वालों के लिए 'खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे' हो या प्यार में कसमें खाने वालों के लिए 'कस्मे वादे निभाएंगे हम' हो। उनके पास हर मौके के लिए एक गाना होता था. यारी है ईमान के लिए उन्हें दूसरी बार फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया।

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