‘कर्तव्य’ रिव्यू: दमदार मुद्दों के बावजूद पूरी ताकत से असर नहीं छोड़ पाई सैफ अली खान की फिल्म, फुटेज में समझें विलेन ने किया मजा किरकिरा
Kartavya ओटीटी दौर की उन फिल्मों में शामिल है, जो समाज के कड़वे सच को सामने लाने की कोशिश करती हैं। फिल्म जातिवाद, ऑनर किलिंग, पाखंडी बाबाओं का नेटवर्क, सिस्टम में फैला भ्रष्टाचार और इंसानियत जैसे गंभीर मुद्दों को छूती है। कहानी का मकसद बड़ा है और विषय भी मजबूत हैं, लेकिन फिल्म अपने इरादों जितनी प्रभावशाली नहीं बन पाती।
फिल्म में Saif Ali Khan एक ईमानदार पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आते हैं। उनके साथ Rasika Dugal और Sanjay Mishra जैसे बेहतरीन कलाकार हैं, जो अपने अभिनय से कई दृश्यों को मजबूत बनाते हैं। खासकर सैफ का गंभीर और संयमित अभिनय फिल्म को संभालने की कोशिश करता है। कई समीक्षकों ने भी माना कि सैफ अली खान फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं।
फिल्म की कहानी छोटे शहर के एक पुलिस अफसर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक पत्रकार की हत्या की जांच करते हुए समाज और सिस्टम के कई अंधेरे सच से टकराता है। फिल्म का माहौल रियलिस्टिक रखने की कोशिश की गई है और इसे पारंपरिक मसाला फिल्मों से अलग बनाया गया है।
हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसका विलेन बन जाता है। Saurabh Dwivedi ने बाबा आनंद श्री का किरदार निभाया है, लेकिन वह उस स्तर का डर और रहस्य पैदा नहीं कर पाते जिसकी कहानी को जरूरत थी। कई दर्शकों और समीक्षकों ने भी उनके अभिनय को फिल्म का कमजोर पक्ष बताया है।
फिल्म की पटकथा भी कई जगह बिखरी हुई महसूस होती है। कुछ दृश्य असर छोड़ते हैं, लेकिन कहानी लगातार पकड़ बनाए रखने में सफल नहीं हो पाती। कई समीक्षाओं में इसे “धीमी लेकिन देखने लायक” फिल्म कहा गया है, जबकि कुछ दर्शकों ने इसके क्लाइमेक्स और स्क्रीनप्ले को कमजोर बताया।
तकनीकी रूप से फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और सिनेमैटोग्राफी माहौल बनाने में मदद करते हैं। फिल्म में छोटे शहर की घुटन, तनाव और सामाजिक दबाव को अच्छे तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। कुछ दर्शकों ने सैफ अली खान की एक्टिंग की तारीफ की, जबकि कई लोगों ने कहानी और विलेन को निराशाजनक बताया।

