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‘हिंदू-मुस्लिम के झगड़े से ऊपर उठना होगा’, वीडियो में शबाना आजमी बोलीं- कट्टरपंथी दोनों तरफ हैं

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बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी ने धार्मिक कट्टरता और हिंदू-मुस्लिम विवाद को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके पति एवं लेखक जावेद अख्तर को हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के कट्टरपंथी वर्गों की नाराजगी झेलनी पड़ती है। शबाना आजमी ने कहा कि कभी उन्हें फतवा जारी किए जाने की बात सामने आती है, तो कभी उन्हें आतंकवादी तक कहा जाता है।शबाना आजमी ने जूम को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें और जावेद अख्तर को दोनों तरफ के कट्टरपंथियों से विरोध का सामना करना पड़ता है। अभिनेत्री के मुताबिक, यही बात उनकी धर्मनिरपेक्ष सोच को भी दर्शाती है।

‘दोनों कट्टरपंथी हमें बर्दाश्त नहीं कर पाते’

शबाना आजमी ने कहा कि उनके और जावेद अख्तर के लिए यह एक तरह से ‘श्रेय’ की बात है कि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के कट्टरपंथी उन्हें स्वीकार नहीं कर पाते। उन्होंने कहा कि हिंदू कट्टरपंथी और मुस्लिम कट्टरपंथी, दोनों ही वर्गों की ओर से उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है।अभिनेत्री ने कहा कि जब दोनों तरफ के कट्टरपंथी उनसे नाराज होते हैं तो उन्हें लगता है कि उनकी धर्मनिरपेक्ष सोच अपनी जगह कायम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी व्यक्ति की पहचान को केवल उसके धर्म के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

‘कभी फतवा तो कभी आतंकवादी कह दिया जाता है’

शबाना आजमी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कभी कोई मौलवी उन्हें फतवा देने की बात करता है, तो कभी कोई उन्हें आतंकवादी कह देता है। उनके मुताबिक, ऐसी परिस्थितियां इस बात को दिखाती हैं कि समाज में धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश होती रहती है।उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज को हिंदू-मुस्लिम के पारंपरिक नैरेटिव से ऊपर उठकर देखना चाहिए। उनके अनुसार, असली संघर्ष हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच नहीं, बल्कि उदार सोच और कट्टर सोच रखने वाले लोगों के बीच होना चाहिए।

‘लिबरल हिंदू और लिबरल मुस्लिम साथ आएं’

अभिनेत्री ने कहा कि उदारवादी सोच रखने वाले हिंदू और मुस्लिमों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। वहीं, उनके अनुसार कट्टर सोच रखने वाले लोगों को भी उनकी विचारधारा के आधार पर देखा जाना चाहिए, न कि केवल धर्म के आधार पर।शबाना आजमी ने कहा कि अगर समाज को धार्मिक कट्टरता से बाहर निकालना है तो लोगों को उन परिस्थितियों में उलझने से बचना होगा, जहां उन्हें हिंदू-मुस्लिम विवाद में धकेला जाता है।उनका कहना है कि जब भी किसी व्यक्ति को हिंदू-मुस्लिम विवाद के बीच खींचने की कोशिश की जाए तो उसे उस बहस में फंसने के बजाय व्यापक नजरिया अपनाना चाहिए।

‘धर्म का जहर इसी तरह निकलेगा’

शबाना आजमी ने कहा कि समाज के भीतर मौजूद धार्मिक कट्टरता को खत्म करने के लिए उदारवादी हिंदू और मुस्लिमों को एक साथ आना होगा। उनके मुताबिक, जब लोग धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे, तभी समाज में मौजूद नफरत और कट्टरता कम हो सकती है।उन्होंने कहा कि लड़ाई हिंदू बनाम मुस्लिम की नहीं होनी चाहिए, बल्कि उदारवादी और कट्टर सोच के बीच होनी चाहिए। अभिनेत्री के मुताबिक, इसी तरह समाज के भीतर से धार्मिक नफरत को खत्म किया जा सकता है।शबाना आजमी लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। इस बार भी उन्होंने धार्मिक कट्टरता के खिलाफ अपनी बात रखते हुए लोगों से हिंदू-मुस्लिम विवाद से ऊपर उठकर सोचने की अपील की है।

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