टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग केस: वीडियो में जाने 4 आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत, हथियार सप्लाई करने का आरोप
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में मुंबई की किला कोर्ट ने चार आरोपियों को 28 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। आरोपियों की पहचान कुणाल संजय, सुमित सरोलिया, राधा वर्मा और बबीता राव के रूप में हुई है। पुलिस का आरोप है कि इन चारों ने फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियारों की सप्लाई करने और कथित साजिश में अहम भूमिका निभाई थी।
मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले में हथियारों की खरीद, उन्हें मुंबई तक पहुंचाने और फायरिंग करने वाले लोगों से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस ने अदालत से आरोपियों की हिरासत 31 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उन्हें 28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया।
हथियारों की सप्लाई और साजिश की जांच
पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियार कहां से खरीदे गए और उन्हें मुंबई तक कैसे पहुंचाया गया। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों और फायरिंग करने वालों के बीच किस तरह संपर्क स्थापित हुआ था।पुलिस का आरोप है कि चारों आरोपियों ने हथियारों की व्यवस्था करने और उन्हें फायरिंग करने वालों तक पहुंचाने में मदद की। जांच एजेंसी अब इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।
मोबाइल फोन से मिले वॉइस नोट्स की जांच
जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से कुछ वॉइस नोट्स मिलने की बात सामने आई है। पुलिस के दावे के मुताबिक, इन वॉइस नोट्स में हथियारों की खरीद, उनकी डिलीवरी और फायरिंग के बाद उन्हें वापस भेजने से जुड़े निर्देशों की बातचीत शामिल है।जांच एजेंसी इन रिकॉर्डिंग्स और अन्य डिजिटल सबूतों की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बातचीत में शामिल लोग कौन थे और हथियारों की सप्लाई की पूरी प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी।डिजिटल सबूतों की पुष्टि और उनकी प्रासंगिकता जांच का अहम हिस्सा होगी। इन रिकॉर्डिंग्स के आधार पर सामने आने वाले तथ्यों को अन्य सबूतों से मिलाकर देखा जाएगा।
अनिल पंडित के निर्देश पर काम करने का आरोप
मुंबई पुलिस का दावा है कि आरोपी अनिल पंडित के निर्देश पर काम कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने फायरिंग करने वालों को हथियार उपलब्ध कराने में सहायता की थी। जांच एजेंसी अब कथित निर्देशों, हथियारों की सप्लाई और फायरिंग की घटना के बीच संबंध स्थापित करने की कोशिश कर रही है।हालांकि, आरोपियों की भूमिका और अनिल पंडित से जुड़े दावों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। पुलिस के आरोपों को अदालत में साबित किया जाना आवश्यक होगा।
28 अक्टूबर तक पुलिस कस्टडी
मुंबई क्राइम ब्रांच ने चारों आरोपियों की पुलिस हिरासत 31 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की थी, ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा सके। हालांकि, किला कोर्ट ने 28 अक्टूबर तक की पुलिस हिरासत मंजूर की।इस अवधि में पुलिस हथियारों की खरीद और सप्लाई से जुड़े तथ्यों, मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों और कथित साजिश में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगी।

